मुंबई. लगातार तीन दिन तक हड़ताल पर रहने वाले 1200 आवासीय चिकित्सकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. राज्य सरकार और नगर निगम की ओर से कहा गया है कि बड़े पैमाने पर यह हड़ताल अगर जारी रहेगी तो कार्रवाई की जाएगी जिसमें निलंबन भी संभव है.

बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा नोटिस मिलने के बावजूद छात्रों ने बड़े पैमाने पर अनुपस्थित रहने का फैसला किया. वहीं बुधवार को चिकित्सा अध्यापकों ने हड़ताल में शामिल होने की धमकी दी. इस संबंध में वह अपने अधिकारियों को नोटिस भी दे सकते हैं. 18 सार्वजनिक मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य सेवाएं, जो वरिष्ठ संकाय सदस्यों द्वारा चलाए जा रहे हैं, अगर वे भी काम पर हड़ताल करते हैं, तो वे जारी रखेंगे.

महाराष्ट्र में 4000 से अधिक निवासी डॉक्टर पिछले तीन दिनों से हड़ताल पर है. मीडिया रिर्पोट के मुताबिक जब उनके धुले और मुम्बई के दो साथियों की हत्या कर दी गयी. जिसमें धुले के चिकित्सक बुरी तरह घायल कर दिया. जिससे उनकी एक आंख में गम्भीर चोटें आयी.

छात्रों ने कहा कि, ‘साल दर साल हमसे कई बार इसे रोकने के वादे किए गए हैं, लेकिन हमले होने नहीं रुके. चिकित्सकों को अपने जीवन के लिए डर लगता है. छात्र कैंपस में तब तक वापस नहीं जाएंगे, जब तक कि उन्हें लगता है कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं है.’ अंततः इसका असर रोगी देखभाल पर पड़ेगा. वहीं हड़ताल पर एक निवासी डॉक्टर ने कहा कि, ‘निगम और राज्य को पिछले साल जून में अदालत ने पास सिस्टम को लागू करने और रिश्तेदारों की संख्या को प्रतिबंधित करने के लिए निर्देशित किया था. नौ महीने बीत चुके हैं लेकिन कार्यान्वयन का कोई संकेत नहीं है.’

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न्यायपालिका और सरकार ने सुरक्षा उपायों के क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों के बजाय विद्यार्थियों के खिलाफ इस तरह का कड़ा रुख अपनाया. चिकित्सा समुदाय भी इससे परेशान था. वहीं डॉक्टरों को आतंकवाद के माहौल में काम जारी रखने की उम्मीद है, जबकि कुछ लोगों को यदि धमकी मिल जाये तो उन्हें ज़ेड-प्लस सुरक्षा मिल जाती है. इस दौरान एक वरिष्ठ डॉक्टर से सवाल पूछा गया कि क्या यह छात्रों के लिए उचित है?

इस पर एक अन्य चिकित्सक ने कहा कि, ‘निवासी डॉक्टर अस्पताल के कर्मचारियों की संख्या का केवल 30-40% का गठन करते हैं.’ वहीं एक निवासी ने कहा, ‘सेवाओं को क्यों अपंग होना चाहिए? वरिष्ठ चिकित्सक कहां हैं? वे ओपीडी संचालित क्यों नहीं कर सकते हैं?’  इस दौरान दूसरे निवासी ने कहा, ‘यह प्रणाली उन निवासी डॉक्टरों पर निर्भर करती है, जो केवल पीजी छात्रों के लिए होती है.’

मीडिया रिर्पोट के मुताबिक इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और मेडिकल कंसल्टेंट्स एसोसिएशन के छात्रों की डॉक्टरों के पीछे अपना वजन कम करने की संभावना है. खबर यह भी है कि इसकी मदद फंड के रूप में हो सकती है. जिससे वे वरिष्ठ वकील को किराए पर ले सके. वहीं दोनों डॉक्टर संघों ने इस बिंदु पर कुछ भी पुष्टि नहीं की. चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय (डीएमईआर) के प्रमुख डॉ प्रवीण शिंगारे ने कहा कि, ‘यह एक गलत धारणा है कि राज्य ने कुछ नहीं किया है. पिछले पांच वर्षों में महाराष्ट्र के मेडिकल कॉलेजों में सुरक्षा की ताकत 500 से बढ़ाकर 1200 हो गई है. 1100 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए गए हैं. छात्र बताएं कि उन्हें क्या चाहिए? हम उन्हें देंगे, लेकिन उन्हें चाहिए कि काम फिर से शुरू करें और रोगियों को पीड़ित न होने दें.’

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