नई दिल्ली. पंजाब और गोवा के विधानसभा में हुई हार के बाद कार्यकर्ताओं के टूटे मनोबल को फिर से बढ़ाकर एमसीडी चुनाव जिताने के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल 31 मार्च से चुनावी मैदान में उतरेंगे. वह पूरी दिल्ली में अधिक से अधिक रैलियां करेंगे. पार्टी को उम्मीद है कि भाजपा और कांग्रेस का निगम में शासन देख चुकी है. इस बार जनता ‘आप’ को मौका देगी.

मीडिया रिर्पोट के मुताबिक मुख्यमंत्री की रैलियों में पदयात्र, उनके वीडियो संदेश सहित अन्य माध्यम से भी उनके विचार जनता के सामने रखे जाएंगे. वहीं पार्टी सूत्रों का कहना है कि, ‘इस चुनाव में नोटबंदी पर बात नहीं होगी. इसे पार्टी की बदली रणनीति से जोड़ कर देखा जा रहा है.’ खबर है कि इससे पहले पार्टी नोटबंदी को निगम चुनाव में एक मुद्दा के रूप में सामने लाने की बात कह रही थी, लेकिन बदले राजनीतिक हालात के चलते मुद्दे भी बदले हैं.

मीडिया रिर्पोट्स के मुताबिक इसी तरह अन्य राष्ट्रीय मुद्दे निगम चुनाव प्रचार अभियान के दौरान दूर रखे जाएंगे. पार्टी ने निगम चुनाव को पूरी तरह से एमसीडी के मुद्दों तक ही सीमित रखने की योजना बनाई है. जिसमें दिल्ली की लचर सफाई व्यवस्था व भ्रष्टाचार पर पार्टी का ध्यान अधिक केंद्रित होगा. वहीं दिल्ली सरकार द्वारा दो साल में कराए गए विकास कार्य भी जनता के सामने रखे जाएंगे.

पार्टी नेता आशीष तलवार ने कहा है कि, ‘जहां एक ओर भाजपा व कांग्रेस वाले अपनी पार्टियों की अंदरूनी लड़ाई में व्यस्त हैं. वहीं आप पार्टी में अधिकतर टिकटे बांटी जा चुकी हैं. वैसे तो पार्टी के कार्यकर्ता और विधायक चुनाव प्रचार में लगे ही है, उम्मीद है कि अरविंद केजरीवाल 31 मार्च को मैदान में उतरकर ताबड़तोड़ चुनाव प्रचार करेंगे. वहीं पार्टी का कहना है कि दिल्ली में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के चेहरे को सामने रखते हुए दिल्ली नगर निगम चुनाव लड़ा जाएगा.’

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