देश के गौरव 4: जो भारत की आजादी के लिए शहीद हुए, पर उनके नाम कभी पुकारे नहीं गए। जैसे कि हमने वादा किया था कि ‘सद्प्रयास’ देश के उन हजारों देश भक्त वीर सपूतों के बारे में भारत के आम आदमी को संक्षिप्त जानकारी देगा, अपना वादा निभाते हुए ‘देश के गौरव’ स्तम्भ की दूसरी कड़ी अत्यंत हर्ष एवं गौरव सहित समर्पित एवं प्रस्तुत है।
17. अधर सिंह: गांव पिपली, ज़िला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश में पैदा हुए। भारतीय सेना (ब्रिटिश) के डोगरा रेजीमेंट में सिपाही।1942 में आज़ाद हिन्द फौज के बहादुर ग्रुप में शामिल हुए। ब्रिटिश सेना के साथ लड़ाई में तांगू (बर्मा) में शहीद हुए।
18. अचूथन कलारोथ वलाप्पिल: पिता का नाम श्री के.वी. गोपालन। गांव तेली-चेरी, ज़िला कन्नूर, केरल में 1919 में पैदा हुए।पांचवीं कक्षा तक शिक्षित। पेशे से बीड़ी बनाने वाले। 1954 में फ्रांस के कब्जे से माहे को छुड़ाने के लिए लोकप्रिय आंदोलन में भाग लिया। 26 मार्च 1954 की रात को एक फ्रेंच पुलिस पोस्ट चेक कल्लई पर कब्जा करने की कोशिश में शामिल हुए। उसी दिन फ्रेंच पुलिस की फाइरिंग में शहीद हुए।
19. अन्तय्या अदिराला: पिता का नाम श्री रमय्या, कृषक। हैदराबाद राज्य को भारतीय संघ में शामिल करने की मांग को लेकर किए गए आंदोलन में भाग लिया (1947-48)। निज़ाम के प्रशासन के विरुद्ध कोई कर- नहीं अभियान में भाग लिया। निज़ाम की पुलिस और रज़कर के हमले में शहीद हुए।
20. अदसूल शिवाजी: पिता का नाम श्री केशव अदसूल गांव टाड़वाले, ज़िला शोलापुर, महाराष्ट्र में 1930 में पैदा हुए। सातवीं कक्षा का विद्यार्थी, हैदराबाद राज्य के भारतीय संघ में विलय के लिए किए गए आंदोलन में भाग लिया (1947-48)। राजकरों
के द्वारा गोली मार कर साथियों के साथ मार दिया गया, तब वे बैलगाड़ी में गन्ना ले जा रहे थे।
देश के गौरव भाग 1– भाग 2 – भाग 3 यहां पढ़ें
21. अदुरकर निवरती: पिता का नाम श्री गोविंद अदुरकर 1912 के करीब कोल्हापुर महाराष्ट्र में पैदा हुए। पांचवीं कक्षा तक
पढ़े। कुली। भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया (1942)। कोल्हापुर में अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध प्रदर्शन में भाग लिया (1942)। उसी दिन पुलिस के लाठी चार्ज में घायल हुए और बंदी बना लिए गए। कोल्हापुर ज़िला जेल में शहीद हो गए।
22. अगाधु सामान्त्रा: कोरापुर, ज़िला उड़ीसा में पैदा हुए। भारतीय सेना (अंग्रेजी) के आपूर्ति कॉर्प्स में लांस नायक। आज़ाद हिन्द फौज के प्रथम बहादुर ग्रुप में नायक के रूप में भर्ती हुए। लड़ाई में गंभीर रूप से घायल हुए और अस्पताल में शहीद हो
गए।
23. गुरदास राम अग्रवाल: सुपुत्र श्री हरी चंद 14 जुलाई 1914 को फिरोजपुर , पंजाब में पैदा हुए। नागरिक अवज्ञा आंदोलन के दौरान राष्ट्रवादी कार्यों में सक्रिय रहे (1930)। एक क्रांतिकारी ग्रुप का गठन किया। 31 अक्तूबर 1930 को जीरा जेल के अंदर
कारावास व पुलिस अधिकारियों पर बम फेंका। पकड़े गए और तीन साल की कठोर कारावास की सजा दी गई। जेल में अमानवीय यतनाओं के विरुद्ध अनशन किया। टीबी हो गया और 27 मई 1934 के दिन अंतिम सांस ली।
24. हनुमंत अंग्रे: पिता श्री शेल्लप्पा अंग्रे।गांव टोंडचिर, उसमानाबाद, महाराष्ट्र में 1926 में जन्मे। हैदराबाद की भारतीय संघ
में विलय के लिए हुए आंदोलन में भाग लिया (1948)। 1948 में राजकरों द्वारा उनके गांव पर हमले का विरोध करते हुए
शहीद हुए।
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(साभार, हू’ज हू, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार)।
