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देश के गौरव 5: जो भारत की आजादी के लिए शहीद हुए, पर उनके नाम कभी पुकारे नहीं गए

देश के गौरव 5: जो भारत की आजादी के लिए शहीद हुए, पर उनके नाम कभी पुकारे नहीं गए। जैसे कि हमने वादा किया था कि ‘सद्प्रयास’ देश के उन हजारों देश भक्त वीर सपूतों के बारे में भारत के आम आदमी को संक्षिप्त जानकारी देगा, अपना वादा निभाते हुए ‘देश के गौरव’ स्तम्भ की दूसरी कड़ी अत्यंत हर्ष एवं गौरव सहित समर्पित एवं प्रस्तुत है।

देश के गौरव भाग 1– भाग 2 – भाग 3- भाग 4 यहां पढ़ें

25. यशवंत अगरवाडेकर : पिता नाम श्री सुखा अगरवाडेकर। 15 जनवरी, 1918 को सिओलिम, गोवा में पैदा हुए। चौथी कक्षा तक शिक्षा और पेशा कृषि। गोवा स्वतन्त्रता संग्राम के खुफिया संगठन आज़ाद गोमोन्तक दल में भर्ती हुए। पुर्तगीज पुलिस और फौज के विरुद्ध कई हथियारबंद हमलों में सक्रिय हिस्सा लिया। उनके पकड़े जाने पर 5000 रुपये का इनाम घोषित किया गया था। 17 दिसंबर, 1958 को अंजुनावन में पुलिस दल के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए।

26. मोहम्मद अब्दुल्ला अहंगर: पिता का नाम: श्री करीम अहंगर; नौशेरा श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर में 1981 में पैदा हुए। लोहे का काम करते थे। जम्मू-कश्मीर राज्य में उत्तरदायी सरकार की स्थापना के लिए लोकप्रिय राजनीतिक आंदोलन में भाग लिया। निरंकुश शासन के विरोध में हुए प्रदर्शन में भाग लिया। 1931 में राजकादल श्रीनगर में राज्य की सेना द्वारा जलूस पर गोली चलाने में शहीद हुए।

27. रहमान अहंगर: पिता का नाम: श्री सुल्तान अहंगर। बौगांव, ज़िला अनंतनाग। जम्मू-कश्मीर राज्य में उत्तरदायी सरकार की स्थापना के लिए चलाए गए लोकप्रिय राजनीतिक आंदोलन में सक्रिय हिस्सा लिया। 1931 में गिरफ्तार किए गए और कारावास की सजा सुनाई गई। सेंट्रल जेल श्री नगर में 1931 में शहीद हो गए।

28. रज्जाक अहंगर: पिता का नाम: श्री रहीम अहंगर, 1976 में हजरतबल, ज़िला अनंतनाग के जम्मू-कश्मीर में पैदा हुए। लोहे का काम करते थे। जम्मू-कश्मीर राज्य में उत्तरदायी सरकार के गठन के लिए हुए लोकप्रिय राजनीतिक आंदोलन में सक्रिय हिस्सा लिया। 1931 में निरंकुश शासन के विरुद्ध मलिकनाग, अनंतनाग में प्रदर्शन में भाग लिया। उसी दिन राज्य के सैनिकों द्वारा फायरिंग में शहीद हो गए।

29. अहमद खान: पिता का नाम: श्री हातिम खान, कुरला गामुन, ज़िला डेरा गाजी खां, उत्तर-पश्चिम प्रदेश (आधुनिक पाकिस्तान में)। भारतीय सेना के पंजाब रेजीमेंट में सिपाही। 1942 में आज़ाद हिन्द फौज के तृतीय गुरिल्ला रेजीमेंट में हवलदार भर्ती हुए। बर्मा में ब्रिटिश सेना से लड़ते हुए गंभीर रूप से घायल हुए। म्याम्यो अस्पताल बर्मा में शहीद हुए।

30. अजित सिंह: भारतीय सेना के 5/18 गढ़वाल राइफल में सिपाही। 1942 में आज़ाद हिन्द फौज (INA) में प्रथम गुरिल्ला रेजीमेंट में नायक भर्ती। गवांग बर्मा में ब्रिटिश सेना से लड़ते हुए शहीद हुए।

31. अजित सिंह: भारतीय सेना (ब्रिटिश) के पंजाब रेजीमेंट 7/8 में सिपाही। 1942 में आईएनए में शामिल। अंग्रेज़ी सेना से लड़ते हुए मिथाहक में घायल और शहीद।

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साभार: हूज़ हू ऑफ इंडियन मर्ट्यर्ज़

 

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