राष्ट्र एवं समाज को समर्पित संस्था ‘सद्प्रयास’ का उदेश्य भी और वादा भी रहा है कि हम सदा देश और समाज के हाशिये पर रखे गए लोगों के हित में प्रयासरत रहेंगे। जो सत्य भी है और शाश्वत भी, जिसके लिए हमने कीमतें भी चुकाई हैं, भविष्य में भी तैयार रहेंगे। क्योंकि समर्थों के साथ तो सब कुछ होता है, सब खड़े होते हैं परन्तु असमर्थों, लाचारों का साथ तो उनका साया भी नहीं देता। हर जगह, हर पल उन्हें तिल-2 गलना होता है। हाशिये का आदमी अपनी दैहिक मृत्यु तक कई-2 बार, हजारों-लाखों बार मरता है या मरना पड़ता है या मारा जाता है। उसका कोई अपना अस्तित्व नहीं होता, उसे किसी की परछाई बन कर जीना होता है। वह दूसरों के लिए अपने वजूद को मिटाता चला जाता है। गरीब कहीं देश की सीमा पर, कभी कारखाने में, कहीं खेत मेँ, कभी कहीं राजपथ, कोई नहर, किसी भवन को बनाते हुए जान गंवाता है। लेकिन वह अपने बलिदान को ढोल पीट-2 कर प्रचारित नहीं करता। उसकी कुर्बानियों को भुना कर अपने महल बनाने संदिग्ध चरित्र के लोग तो अन्य ही होते हैं।
इसी प्रकार जन साधारण ने देश मेँ स्वतन्त्रता के लिए हुए आंदोलन के दौरान 1857 से 1947 तक बहुत कुर्बानियां दी। देश के लाखों सपूतों ने सर्वोच्च बलिदान दिया लेकिन उनमें से कुछ को ही लोगों ने जाना। शेष बहुत से ऐसे शहीद आज तक भी गुमनाम रहे, जिन्हें लोग जान नहीं पाये। जिन्हें याद करने, नमन करने तक का अवसर न मिल सका। हम चाहते हैं कि उन शहीदों को आप के साथ-2 देश भी याद करे। इस लिए आप पाठकों की अनुमति से इस विषय मेँ ‘देश के गौरव’ शीर्षक से ‘सद्प्रयास’ मेँ एक स्तम्भ शुरू करने जा रहे हैं। आज के संदर्भ मेँ यह और भी महत्वपूर्ण है, जब देश मेँ पिचपिचे देशभक्त खूब हुल्लड़ मचाये हुए हैं। इस देश की बहुरंगी समाज-संस्कृति को मिटा कर एकरंगी बनाने मेँ प्रयासरत हैं। कमजोरों, गरीबों, अल्पसंख्यकों, दलितों, आदिवासियों तथा हाशिये के लोगों को मारने-पीटने, अत्याचार करने यहां तक कि जान से मार देने के बहाने तलाशते हैं। इस या उस बहाने कमजोरों को जान से मार दिया जा रहा और बहादुरी के लिए एक-दूसरे की पीठें थपथपाई जा रही है।
जैसे कि हमने वादा किया था कि ‘सद्प्रयास’ देश के उन हजारों देश भक्त वीर सपूतों के बारे में भारत के आम आदमी को संक्षिप्त जानकारी देगा, अपना वादा निभाते हुए ‘देश के गौरव’ स्तम्भ की पहली कड़ी अत्यंत हर्ष एवं गौरव सहित समर्पित एवं प्रस्तुत है। (साभार, हू’ज हू, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार)।
देश के गौरव-1
1. आन सिंह: भारतीय सेना (ब्रिटिश) के 5/18 गढ़वाल राईफ्लस का सिपाही। 1942 में आज़ाद हिन्द फौज के पैदल सेना की तीसरी बटालियन में शामिल हुए। युद्ध के दौरान आइसन बर्मा में शहीद हुए।
2. अबाराव गणपतराव:- गांव वडगावकारी, ज़िला उस्मानाबाद, महाराष्ट्र में 1917 में पैदा हुएऔर चौथी कक्षा तक पढ़ाई की, पेशे से कृषक, 1947-48 के हैदराबाद राज्य को भारतीय संघ में मिलाने के लिए चले (लोकप्रिय जनांदोलन) में भाग लिया। 1948 में शहीद हुए।
3. अब्बोजू, रमैय्या: उनके पिता का नाम ब्रह्मय्या था और गांव निम्मिकल्लू, ज़िला नालगौंडा के रहने वाले थे। 1947-48 के हैदराबाद राज्य को भारतीय गणतन्त्र में मिलने के लिए चले लोकप्रिय जनांदोलन में शामिल हुए और हमले में 16 अगस्त 1948 के दिन वीरगति को प्राप्त हुए।
4. अबदान सिंह: सुपुत्र श्री शिव रखन सिंह गांव रायबरेली, उत्तर प्रदेश। पेशे से कृषक, 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान सरेनी पुलिस स्टेशन हमले में भाग लिया और अपने भाई सुक्ख सिंह के साथ पुलिस की गोली से वीरगति को प्राप्त हुए। ….क्रमश:……..