जहां एक और देश बढ़ती जनसंख्या, घटते संसाधनों, बढ़ती बेरोज़गारी जैसी समस्याओं से त्रस्त है वहीं केंद्र सरकार ने आज स्पष्ट कर दिया कि वो 2045 तक जनसंख्या नियंत्रण की कोई व्यवस्था लागू करने के पक्ष में नहीं है।

लोकसभा में पूरक प्रश्नों के उत्तर में सरकार की और से जवाब देते हुए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री अनुप्रिया पटेल ने बताया कि जहां तक राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 का सवाल है तो इसका दीर्घावधि लक्ष्य 2045 तक जनसंख्या में स्थिरता लाना है।

पटेल ने बताया कि सरकार सकल प्रजनन दर, Total Fertility Rate (TFR) को कम करने के उद्देश्य से सात राज्यों के 146 जिलों में विशेष जागरूकता अभियान चला रही है। उन्होंने बताया कि उच्च प्रजनन दर वाले इन जिलों में परिवार विकास मिशन शुरू किया गया है।

सरकार द्वारा बढ़ती जनसंख्या को काम करने के लिए चलाये जा रहे कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए परिवार कल्याण मंत्री ने बताया कि जनसंख्या वृद्धि दर को कम करने के लिए 11 विशेष राज्यों में नसबंदी मुआवजा योजना का विस्तार किया गया है।

पटेल ने स्पष्ट किया कि टीएफआर (TFR) घटने के बाद भी जनसंख्या स्थिर रखने का उद्देश्य प्राप्त करने में समय लगेगा। सकल प्रजनन दर वह होती है जिसमें कोई महिला अपने संतान उत्पत्ति काल में औसत बच्चे को जन्म देती है। भारत में कुल प्रजनन दर 2.4 है।

ज्ञात हो कि भारत जनसंख्या के लिहाज से विश्व में दूसरे स्थान पर है। 2001 की जनगणना के मुताबिक, मार्च 2024 तक देश की आबादी 1 अरब 37 करोड़ होने का अनुमान है। जोकि चीन से भी ज्यादा होकर भारत को जनसंख्या के मामले ने नंबर वन पर लेकर खड़ा कर देगी। बढ़ती जनसंख्या किसी भी मायने में देश के लिए हितकर नहीं मानी जा सकती।

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यूनाइटेड नेशंस की 2017 में आयी एक रिपोर्ट के अनुसार भारत की जनसंख्या में लगातार इज़ाफा होता रहेगा। वहीं दूसरी और चीन अपनी जनसंख्या पर आने वाले वक्त में नियंत्रण पा लेगा। अब ऐसे में सरकार ने अपना पल्ला झाड़ते हुए जनसंख्या नियंत्रण पर कोई सख्त कदम ना उठाने की बात कह दी है।