नई दिल्ली, 3 फरवरी: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत की मैक्रोइकॉनॉमिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है और रुपया केवल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है, अन्य किसी मुद्रा के मुकाबले नहीं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रुपये का अवमूल्यन घरेलू आर्थिक कमजोरी का संकेत नहीं है, बल्कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और डॉलर की मजबूती के कारण हुआ है।
वित्त मंत्री ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है जब वैश्विक स्तर पर मुद्रा बाजारों में अस्थिरता देखी जा रही है। उन्होंने कहा, “रुपया केवल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है, जबकि अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले उसकी स्थिति स्थिर बनी हुई है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिरता और मजबूत बुनियाद को दर्शाता है।”
डॉलर की मजबूती का असर
सीतारमण ने बताया कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के चलते डॉलर वैश्विक स्तर पर मजबूत हुआ है, जिससे कई अन्य मुद्राओं की तरह भारतीय रुपया भी प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ भारत की बात नहीं है, बल्कि यूरो, पाउंड और येन जैसी अन्य प्रमुख मुद्राएं भी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुई हैं।”
भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती
वित्त मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था अपनी स्थिरता बनाए हुए है और विभिन्न मैक्रोइकॉनॉमिक संकेतक सकारात्मक हैं। उन्होंने कहा कि देश में जीडीपी वृद्धि दर स्थिर बनी हुई है, विदेशी मुद्रा भंडार पर्याप्त मात्रा में है और महंगाई नियंत्रण में है।
उन्होंने कहा, “सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न आर्थिक सुधारों के कारण भारत की विकास दर मजबूत बनी हुई है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है और विदेशी निवेशकों का भरोसा बना हुआ है।”
रुपये को लेकर सरकार की रणनीति
सीतारमण ने कहा कि सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रुपये की स्थिरता बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठा रहे हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि “हमारी नीतियां दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने पर केंद्रित हैं, और रुपये को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।”
वित्त मंत्री के बयान से स्पष्ट है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत बनी हुई है और रुपये में गिरावट केवल डॉलर के मुकाबले देखी जा रही है। सरकार आर्थिक सुधारों और नीतिगत हस्तक्षेप के जरिए भारतीय मुद्रा और अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।