मैं बेबस नहीं हूं

मैं या कि मानव
डरा हुआ जरूर हूं
इस लिए
डर से जीतने के लिए
डर से मुक़ाबला करता हूं
मैं बेबस नहीं हूं।

अंधेरे से निकलने का
रास्ता तलाश रहा हूं
और जो
रास्ता तलाशता है
वह बेबस नहीं होता
मैं बेबस नहीं हूं।

तभी आज यहां
शान से खड़ा हूं
नहीं तो महासागरों
अजय पर्वतों की तरह
अस्तित्व मिट चुका होता
मैं बेबस नहीं हूं।

‘अस्तित्व के लिए संघर्ष’
करता हूं
और यह भी अच्छे से
समझता हूं कि
‘मुक्ति औ’ शक्ति, भीख औ’ दान में नहीं मिलती’
मैं बेबस नहीं हूं।

अदृश्य शत्रु से
अंधेरे में लड़ रहा हूं
यह जानते हुए कि
हर भस्मासुर के लिए
कोई शिव जिम्मेदार होता है
मैं बेबस नहीं हूं।

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