हाहाकार मच गया था कुल्लू तबाह हो गया लेकिन ‘ब्यास’ के शांत होने के दूसरी सुबह चार बजे रात रहते उस स्थान पर जहां कल…
जीवनदायिनी ‘ब्यास’ का इतना रौद्ररूप पहले न देखा था पहाड़, जंगल, मिट्टी प्राकृतिक क्या, मानवनिर्मित क्या सब अपने साथ बहाये ले जा रही थी। न,…
एक सप्ताह से अधिक का समय हो गया है, देश के पर्यटक क्षेत्र ज़िला कुल्लू के मुख्यालय कुल्लू के साथ लगती पंचायत मौहल के लोग…
तीन दिन तक तबाही मचाने के बाद आज मौसम साफ हुआ और धूप निकली। लेकिन पूरी तरह राहत मिलने में तो अभी काफी समय लगेगा।…
तुम बोलते हो जब तो मुझे अपनी आवाज़ का आभास होता है। तुम्हारी सांसों से उभरते-पिचकते सीने को देख अपने ज़िंदा होने का एहसास होता…
‘दलित’ परिणाम है उदविकास का, अछूत से हरिजन हरिजन से दलित बनने में सैंकड़ों साल का समय और बुद्ध, फुले, पेरियार अम्बेडकर जैसे असंख्य महात्माओं…
मैं भी वामपंथी हूं तू भी वामी परन्तु अन्तर के साथ मैं उस पर विश्वास करता हूं तू दावा मैं उसे जीता हूं और तू…
पिछले तीन वर्षों में अपनी मातृक-पैतृक भूमि जहालमा नहीं जा पाया था। कारण था खेती और जमीन की व्यवस्था छोटे भाई के हवाले थी…
मैं चाहता हूं। यह ठीक है कि, मैं तुम से छोटा हूं क्योंकि तुम जौंक बन मेरा खून चूसते गए और, मैं चुपचाप, असहाय अपना…
यूं तो मैं लिखता ही नहीं यूं तो मैं लिखता ही नहीं यदि कभी कुछ लिखूँ तो अपने सीने के पवित्र लहू से ही लिखता…