जीवनदायिनी ‘ब्यास’ का इतना रौद्ररूप पहले न देखा था पहाड़, जंगल, मिट्टी प्राकृतिक क्या, मानवनिर्मित क्या सब अपने साथ बहाये ले जा रही थी। न,…

एक सप्ताह से अधिक का समय हो गया है, देश के पर्यटक क्षेत्र ज़िला कुल्लू के मुख्यालय कुल्लू के साथ लगती पंचायत मौहल के लोग…

तुम और मैं

September 24, 2018 132

तुम बोलते हो जब तो मुझे अपनी आवाज़ का आभास होता है। तुम्हारी सांसों से उभरते-पिचकते सीने को देख अपने ज़िंदा होने का एहसास होता…

‘दलित’ परिणाम है उदविकास का, अछूत से हरिजन हरिजन से दलित बनने में सैंकड़ों साल का समय और बुद्ध, फुले, पेरियार अम्बेडकर जैसे असंख्य महात्माओं…

मैं भी वामपंथी हूं तू भी वामी परन्तु अन्तर के साथ मैं उस पर विश्वास करता हूं तू दावा मैं उसे जीता हूं और तू…

मैं चाहता हूं। यह ठीक है कि, मैं तुम से छोटा हूं क्योंकि तुम जौंक बन मेरा खून चूसते गए और, मैं चुपचाप, असहाय अपना…