उस दिन काफी दिनों बाद शहर गया था। पता चला कि कुल्लू में काफी दिनों से बाहर से कुछ लोग आए हुए हैं जो मशीनों की मदद से हर रोग का इलाज कर रहे हैं। सुन तो मैंने पहले रखा था, लेकिन उस दिन कुल्लू में इस विषय में कुछ अधिक जानकारी प्राप्त हुई। उस दिन वैसे भी भाजपा वालों का त्रिदेव कार्यक्रम था और केंद्रीय मंत्री गडकरी साहब आए हुए थे। लोगों में बड़ी हलचल थी। इधर मंडी संसदीय क्षेत्र में प्रदेश के अनुसूचित जनजातीय क्षेत्र लाहौल-स्पीति एवं पांगी भी शामिल हैं। इसलिए वहां के बहुत से लोग इस कार्यक्रम में आए थे लेकिन एक बड़ी संख्या में लोग कुल्लू में मशीनों से उपचार के लिए भी पहुंचे हुए थे। इसलिए उस मशीनों द्वारा चिकित्सा के बारे में जानने की मेरी उत्सुकता बढ़ी और मैंने लाहौल से आए हुए मरीजों में से कुछ को पकड़ ही लिया और उनसे बातचीत करने पर पता चला कि उसे थर्मो थेरेपी कहते हैं। जिसे दक्षिणी कोरिया की ‘सेराजेम’ कम्पनी के स्थानीय डीलर चला रहे हैं। 40 मिनट प्रति दिन बिना किसी फीस के थेरेपी मुफ्त की जाती है।
इस ‘मुफ्त’ ने मेरी जिज्ञासा में और अधिक वृद्धि कर दी क्योंकि आज के इस समय में बिना कुछ लिये-दिये कौन कुछ करता है? और मैं उस स्थान पर पहुंच गया जहां यह उपचार क्रिया चल रही थी। मैं हैरान हो रहा था कि ऐसा कौन आ गया मुफ्त इलाज करने, जबकि डॉक्टर और अस्पताल मरीज़ों को दोनों हाथों से लूट रहे हैं। यहां तक कि कोई न कोई, अफवाह निकलवा कर दवाइयां और उपचार लेने के लिए लोगों को उकसाया जाता है। मुझे लग रहा था कि यदि ऐसा सच में है तो कोई गैर-सरकारी संगठन इस को चला रहा होगा लेकिन वह कार्यक्रम किसी एनजीओ का भी नहीं था।
काफी खोजबीन के बाद पता चला कि असल में कम्पनी के डीलर फ्री का डेमोस्ट्रेशन देकर अपने थर्मो थेरेपी की मशीनों की बिक्री का प्रोमोशन कर रहे थे। इस मामले में यह भी पता चला कि कुछ ही दिनों में कुल्लू के बिक्री केंद्र में 20-25 मशीनें बिक चुकी हैं और एक छोटी मशीन की कीमत सिर्फ 1.4 लाख है और बड़ी मशीन कि कीमत 2.35 लाख रुपये हैं जो जीएसटी लागू होने के बाद क्रमश: लगभग दो और तीन लाख की हो जायेंगी। तब पता चला इस फ्री सेवा के पीछे का उद्देश्य। फ्री उपचार बनाम दो-तीन लाख की मशीन….?