करनाल. हरियाणा के करनाल में सैकड़ों दलित परिवार गांव छोड़ने को मजबूर हो गए हैं. आपको बता दें कि पिछले शुक्रवार को एक शादी के दौरान दलित समाज के लोगों को घुड़चड़ी करने और डीजे बजाने से रोका गया था. जिससे दो समुदायों में तनाव पैदा हो गया था. दोनों पक्षों ने लड़ाई के दौरान ईंट-पत्थर भी चलाए. इसमें कई लोग घायल भी हुए थे.

आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पीड़ित परिवार इतने बेबस हो गए कि उन्हें गांव से पलायन करने का कठोर निर्णय लेना पड़ा. प्रशासन के तमाम अधिकारी देर रात तक ग्रामीणों को समझाते रहे, लेकिन वह इसी बात पर अडे़ रहे कि, ‘आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए और उनकी सुरक्षा का माहौल गांव में तैयार हो. इसके साथ ही वे गांव नहीं जाने की बात पर भी अडे़ रहे.’

अंबाला के एडीसी आरके  सिंह भी ग्रामीणों को समझाने के लिए जिला सचिवालय पहुंचे. उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत की और उनकी मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया. वहीं ग्रामीणों ने कहा कि, ‘आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने तक वह कहीं नहीं जाएंगे.’ पुलिस ने घुड़चढ़ी नहीं करने देने के मामले में 42 लोगों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट व अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है. लेकिन उनकी गिरफ्तारी अभी नहीं हुई है.

खबर है कि यह विवाद सोमवार को फिर गरमा गया. इसके बाद करनाल के गावं सग्गा के कई दर्जन दलित परिवार के लोगों ने सोमवार को गांव छोड़ दिया. वे गांव में अपने घरों के सामान व छोटे छोटे बच्चों सहित गांव से बाहर निकले और करनाल में जाकर कर्ण पार्क में जाकर बैठ गए. जिसके बाद पुलिस प्रशासन के हाथ पांव फूले गये है.

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गौरतलब है कि दलित समाज के युवक की घुड़चड़ी रोकने के बाद दोनों पक्षों के बीच जमकर हंगामा हुआ था. फिर जमकर पत्थरबाजी भी हुई थी. जिसमें पुलिस का एक कर्मचारी बुरी तरह से घायल हो गया था और पथराव के दौरान काफी लोगों को चोटें भी लगी थी. काफी मशक्कत के बाद जिला प्रशासन ने दोनों पक्षो के बीच में समझौता भी करवाया गया था. उसके बाद बारात को भेज दिया था.

लेकिन खबर है कि सोमवार को दलित समाज के लोग अपने बच्चों के साथ और अपने अपने घर का सामान लेकर गांव से पलायन कर लिया. वहीं दलित समाज के लोगों का कहना है की, ‘उनके गांव में पुलिस प्रशासन तैनात होने के बावजूद भी दलितों पर अत्याचार हो रहे हैं. गांव में हमारा राशन पानी सब बंद कर दिया गया है. हमारा सामाजिक बहिष्कार किया जा रहा है. दो ‌दिन बीतने के बावजूद भी पुलिस प्रशासन ने कोई करवाई नहीं की.’

अब हालत ये है कि पुलिस प्रशासन के समझाने के बावजूद भी गांव वाले मानने को तैयार ही नहीं है. गांव के लोग अपने बच्चों के साथ गांव से पलायन कर करनाल सीएम सिटी में डेरा डाल दिया है. इस समय सभी परिवार करनाल के स्थानीय कर्ण पार्क में डेरा डालकर बैठे हुए है. वहीं  प्रशासनिक अधिकारी उन्हें समझाने की लगातार कोशिश कर रहे हैं.