नई दिल्ली. यूपी विधानसभा में सपा और कांग्रेस के गठबंधन के बाद कांग्रेस को मिली करारी हार का सामना करना पड़ा है. विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को महज 7 सीटें मिली. यह कांग्रेस की अब तक की सबसे बड़ी हार है. वहीं हार के बाद पीके कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के निशाने पर भी आ गए हैं. खबर है कि लखनऊ में कांग्रेस ऑफिस के बाहर एक पोस्‍टर लगाया गया है. इस पोस्‍टर में लिखा गया है, ‘स्वयं-भू चाणक्य प्रशांत किशोर को खोजकर उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ता सम्मेलन में लाने वाले किसी भी नेता को पांच लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा.’

खबरों के मुताबिक यह पोस्टर यूपी कांग्रेस कमिटी के सचिव राजेश सिंह ने लगवाया है. इस घटनाक्रम के बाद राजेश सिंह को पार्टी से 6 वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया गया है. वहीं सिंह का कहना है कि, ‘मैंने जो कहा है उस पर मैं कायम हूं. प्रशांति किशोर ने पार्टी को जीत दिलाने का जिम्मा लिया था. हम पार्टी के ईमानदार कार्यकर्ता हैं. हमने पार्टी को खून-पसीना दिया है. हमारी राय को बिल्कुल दरकिनार किया गया. यह हार ऐसे परामर्शदाताओं के कारण ही हुई है.’

आधुनिक तकनीकी का प्रयोग करने वाले प्रशांत किशोर को बिहार सरकार ने 2015 में कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया है. हालांकि प्रशांत जनता के सामने कम ही आते हैं, लेकिन वह पार्टी नेताओं को प्रेस और अन्य गतिविधियों के जरिये जनता के बीच केंद्र में बनाए रखने की पूरी कोशिश करते हैं.  उत्तर प्रदेश में कैपेन के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से कई बार मनमुटाव की खबरें भी आई थीं. हालांकि चुनाव बाद प्रशांत किशोर ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि, उनकी सलाह को कांग्रेस ने यूपी में नहीं माना.’

You May Also Like  गुरमेहर के समर्थक पाकिस्तानी, देश से बाहर निकाल फेंको - बीजेपी मंत्री

पीके का नाम पहली बार 2014 के लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी की भारी जीत के बाद सुर्खियों में आया था. इसके बाद 2015 में इन्होने नीतीश कुमार को बिहार चुनाव जीत दिलाई और बीजेपी को जीत से दूर कर दिया था. दो वर्ष बाद उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में कांग्रेस ने अपनी हालत सुधारने के लिए प्रशांत किशोर को रणनीतिकार बनाया. कांग्रेस ने पंजाब तो जीत लिया लेकिन उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में लुटिया डूब गई. पंजाब में जीत के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रशांत किशोर की भूमिका को सराहा था. मणिपुर और गोवा में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी लेकिन सत्ता से दूर रही.