लखनऊ. उत्तर प्रदेश नये मुख्यमंत्री के आते ही अवैध बूचड़खाने को बंद करा दिया गया. जिससे मीट विक्रेता में आक्रोश में आ गये है. वहीं मछली खाने वालों को भी आज दिक्कत का सामना करना पड़ेगा. खबर है कि बूचड़खाने बंद होने के बाद मीट और चिकेन विक्रेताओं के साथ अब मछली विक्रताओं ने भी हड़ताल का ऐलान कर दिया है.

वहीं बूचड़खाने को बंद करने का कई मांस व्यापारियों ने इसका स्वागत भी किया है. उनका आरोप है कि बूचड़खानों में कुत्तों को भी काटा जाता है. इस कारण 100 साल के इतिहास में पहली बार लखनऊ की शान टुंडे कवाबी बंद रही. इस कारण कई व्यापारी बूचड़खाने का विरोध भी कर रहे हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक लखनऊ बकरा गोश्त व्यापार मण्डल के पदाधिकारी मुबीन कुरैशी ने कहा, ‘हमने अपनी हड़ताल को और तेज करने का फैसला किया है. मांस की सभी दुकानें बंद रहेंगी.’  मछली विक्रेताओं ने भी इस हड़ताल में शामिल होने की घोषणा की है. गौरतलब है कि मटन और चिकन विक्रेताओं के बाद अब मछली कारोबारियों ने भी इस बेमीयादी हड़ताल में शामिल होने का ऐलान कर दिया है.

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में योगी राज आने के बाद लखनऊ समेत प्रदेश के अनेक जिलों में बूचड़खाने बंद करवा दिये गये. कई मांस विक्रेताओं से मांस को खरीद कर होटलों और रेस्त्रां के संचालक अनेक प्रकार के व्यंजन बनाने के लिये इस्तेमाल किया करते थे. अब मटन और चिकन बेचने वालों की हड़ताल की वजह से ये सभी प्रतिष्ठान बंदी की कगार पर पहुंच गए हैं. वहीं कुरैशी ने कहा, ‘बूचड़खानों पर कार्रवाई के कारण लाखों लोगों की रोजीरोटी पर संकट पैदा हो गया है.’

You May Also Like  पार्टी दोबारा सत्ता में आएगी तो गंगाजल से सीएम आवास धुलवाऊंगा: अखिलेश यादव

खबर यह भी है कि शहर में मांसाहार का होटल संचालित करने वाले शमील शम्सी ने प्रदेश में अवैध बूचड़खाने बंद किये जाने का स्वागत करते हुए कहा, ‘अगर सूबे में मांस की किल्लत हुई तो हम दिल्ली से मटन मंगवाएंगे और भोजन की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.’ उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अवैध बूचड़खानों में कुत्तों तक को काटा जा रहा है.

उन्होने यह भी कहा कि, ‘यह धर्म से जुड़ा मामला नहीं, बल्कि सीधे तौर पर लोगों की सेहत से जुड़ा मसला है. हर किसी को अच्छी गुणवत्ता का मांस और मछली खाने का अधिकार है.’ वहीं आदित्यनाथ योगी के अपने इलाके गोरखपुर में भी कसाईखानों में काम करने वाले परेशान हैं. उनका कहना है कि जो पहले लाइसेंसी बूचड़खाने थे उन्हें बंद करवा दिया गया था, जिसके बाद वह घर से काम कर रहे थे, लेकिन लाइसेंस को रिन्यू नहीं किए जाने के कारण मांस बंदी के कगार पर आ गये है.