तीन दिन तक तबाही मचाने के बाद आज मौसम साफ हुआ और धूप निकली। लेकिन पूरी तरह राहत मिलने में तो अभी काफी समय लगेगा। अभी-2 बिजली आई है, पानी अभी नहीं आया है। जगह-2 पर सड़कें टूट गई हैं, कई पुल ट्रेफिक के चलने के नाकाबिल हो गए हैं। नुकसान का अनुमान लगाया जाना बाकी है, यह तो स्थिति कुल्लू की।

उधर लाहौल-स्पिती के बारे में तो कुछ मालूम नहीं हो पा रहा है। तीन दिनों से हर तरह का सम्पर्क टूटा हुआ है। जो कुछ पता लग रहा उसके अनुसार तो लाहौल में सेव, आलू, गोभी, राजमाह आदि की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। सेव के तो बगीचे नष्ट हो गये हैं। भारी संख्या में सेव के पेड़ टूट या उखड़ गए हैं।

पर्यटकों व ट्रेकर्स समेत हजारों लोग रोहतांग के दोनों तरफ फंसे हुए हैं। सबसे बड़ी समस्या तो ट्रेकर्स और पर्यटकों का बचाव है।

मेरी एक मित्र जो यूएसए में पढ़ाती हैं और आजकल लाहौल (केलंग) में फंसी हुई हैं। उन्हों ने फोन पर बताया वहां फंसे हुए बाहर के मजदूरों की स्थिति काफी चिंता जनक है। एक अन्य समस्या स्थानीय लोगों की आर्थिकी की है।

विश्वास है स्थानीय लोग, देश और सरकार मिलकर इस संकट पर पार पायेंगे।

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