नई दिल्‍ली: प्रेस क्‍लब ऑफ इंडिया ने एनडीटीवी पर सीबीआई के छापों और प्रेस की आजादी की रक्षा के लिए एक बैठक का आयोजन किया. दिल्‍ली के प्रेस क्‍लब में विभिन्‍न मीडिया संगठनों के पत्रकार जुटे. इस बैठक में कुलदीप नय्यर, अरुण शौरी, एके दुआ, डॉ. प्रणय रॉय समेत कई बड़े पत्रकार जुटे. फली नरीमन समेत कई कानूविद भी इस चर्चा का हिस्‍सा बने. पढ़ें इस मौके पर किसने क्‍या कहा…

एनडीटीवी के सह संस्‍थापक डॉ. प्रणय रॉय ने कहा, यह खोखला मामला केवल एनडीटीवी के खिलाफ नहीं है. बल्कि यह हम सब के लिए एक संकेत है. ‘हम आपको दबा सकते हैं, भले ही आपने कुछ न किया हो.’ प्रेस की आजादी भारत के लिए सर्वश्रेष्‍ठ बात है. उनका संदेश है, ‘घुटनों के बल चलो या फिर हम तुम्‍हें झुका देंगे. मैं कहता हूं – उनके सामने खड़े हो जाओ, और वो कभी ऐसा नहीं कर पाएंगे.’ हम किसी एजेंसी के खिलाफ नहीं लड़ रहे. वो भारत की संस्‍थाएं हैं. लेकिन हम उन नेताओं के खिलाफ हैं जो इनका गलत इस्‍तेमाल कर रहे हैं.

पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने कहा, ‘मुझे लगता है कि वर्तमान माहौल में चुप रहना कोई विकल्‍प नहीं है. यह वो क्षण है जब हमें इतिहास में सही किनारे पर खड़ा होना होगा.

राज्‍यसभा के पूर्व सदस्‍य और वरिष्‍ठ पत्रकार एचके दुआ ने कहा, ‘पिछली दफा प्रेस के ज्‍यादातर लोग खड़े नहीं हुए थे. और जैसा कि आडवाणी ने कहा था, वो रेंग रहे थे. उसके बाद अवमानना विधेयक आया. हम इकट्ठा हुए हैं, यह एक राष्‍ट्रीय आंदोलन बन जाएगा. राजीव गांधी बात करना चाहते थे लेकिन हमने इनकार कर दिया. प्रेस की एकता ने लड़ाई जीत ली थी. विधेयक वापस लेना पड़ा क्‍योंकि लोग उसके खिलाफ थे. वैसे ही संकेत अब भी दिख रहे हैं. अगर हम एकजुट हों तो हम फिर से उसे दोहरा सकते हैं.

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फली नरीमन ने कहा, फ्रीडम आफ्टर स्‍पीच ही सही मायने में फ्रीडम ऑफ स्‍पीच है. आपराधिक मामलों में कोई भी मुकदमे से बच नहीं सकता, लेकिन जिस तरह से यह किया गया, उससे मुझे लगता है यह प्रेस और मीडिया की आजादी पर हमला हैं. जब कोई सरकारी एजेंसी किसी मीडिया कंपनी के खिलाफ शिकायत दर्ज करती है, तो यह जरूरी है कि छापे मारने से पहले यह जाना जाए कि कंपनी के मालिकों का इस बारे में क्‍या कहना है. यह कोई समर्थन और कृपा का मामला नहीं है बल्कि संवैधानिक कर्तव्‍य का मामला है.

अरुण शौरी ने कहा, आजादी का पाठ फिर से सिखाना जरूरी, डरा कर मीडिया को काबू करने की कोशिश हो रही है. जवाब नहीं दे पा रही है सीबीआई. मौजूदा सरकार सर्वसत्तावादी है. खबर वो है जो सरकार छुपाना चाहे.

शेखर गुप्ता ने मीडिया को एक होने का आह्वाव करते हुए कहा, यह उन समयों में से एक है जब हमें अपने संगठनात्मक और संस्थागत संबद्धता को भूलना होगा। यह एक ऐसी समस्या है जो हमारे सभी संस्थानों से संबंधित है – फ्री प्रेस  यह निशुल्क प्रेस पर एक हमला है

कुलदीप नैय्यर ने कहा, आपातकाल के दौरान, कोई भी किसी को बताता नहीं था कि क्या करना है सबको पता था कि क्या करना है

वरिष्‍ठ पत्रकार ओम थानवी ने कहा, मीडिया को एक होने की जरूरत है.

 

खबर NDTV इनपुट , फोटो SADPRAYAS