आधुनिक भारत में एक और जहाँ देश में खाने पीने के नाम पर एक जाती धर्म विशेष के लोगों को निशाना बनाया जा रहा हो वहां पर देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम एक अकेले ऐसे नाम हैं जिनको किसी भी धर्म की परिधि में नहीं बाँधा जा सकता है। पर शायद सरकार में बैठे लोग इस बात को अनदेखा कर गए तभी 27 जुलाई, 2017 को देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की दूसरी पुण्यतिथि के अवसर पर स्थापित की गयी उनकी मूर्ति के के साथ भगवद गीता को रख दिखा। जाहिर बात है विवाद होना था, खूब हुआ। अब खबर है की आनन-फानन में उनकी प्रतिमा के साथ बाइबिल और कुरान को भी रख दिया गया है ताकि मामला किसी तरह शांत हो सके।
मामला क्या था
दरअसल बीती 27 जुलाई, 2017 को देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की दूसरी पुण्यतिथि थी। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तमिलनाडु के रामेश्वरम में कलाम की एक प्रतिमा का अनावरण किया गया था। कलाम के गृहनगर पीकारुंबू में बने इस लकड़ी के प्रतिमा में कलाम वीणा बजाते दिखाया गया है। साथ ही प्रतिमा के पास भगवत-गीता भी रखा गया था जिसपर विवाद शुरू हो गया है। सद्प्रयास ने इस खबर को प्रमुखता से छापा था।
तमिलनाडु के रामेश्वरम में देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की दूसरी पुण्यतिथि के मौके पर एक प्रतिमा का अनावरण किया गया था. लेकिन इस प्रतिमा के आगे भगवत-गीता रखे होने से विवाद शुरू हो गया है, जिसके बाद आनन-आनन में प्रतिमा के आगे अब कुरान और बाइबल भी रख दी गई है। इस प्रतिमा के अलावे रामेश्वरम में कलाम की समाधि के पास एक स्मारक भी बनवाया गया है जिसका अनावरण भी प्रधानमंत्री मोदी की।
वैज्ञानिक सोच के पोषक कलाम के प्रतिमा के पास गीता रखे जाने पर एमडीएमके नेता वाइको ने बीजेपी पर आरोप लगया की पार्टी कलाम को भगवा रंग में रंगने की कोशिश कर रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कलाम के स्मारक को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन ने करीब 16 करोड़ रुपये खर्च करके एक साल में तैयार किया है।