नई दिल्ली. पिछले महीने सेना के एक जवान ने सेना के सीनियर अधिकारियों पर सवाल खड़े किए थे जिसके बा देशभर में बहस शुरु हो गई थी. वैसा ही एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें सेना का एक जवान ने आरोप लगाए हैं कि उससे अधिकारियों के द्वारा सहायक के तौर पर काम कराया जाता है. सिंधव जोगीदास नाम के जवान ने सेना के सीनियर अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसे छुट्टी के बाद देरी से आने पर सजा के रुप में सहायक के तौर पर काम कराया गया.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वीडियो में जवान ने आरोप लगाया कि वह छुट्टी से दो दिन लेट आया. इस वजह से सजा के रूप में जबरदस्ती सहायक ड्यूटी पर लगा दिया गया. इसके साथ ही जवान ने कहा मैं पहले से ही 2014 में इस सहायक ड्यूटी को कर चुका था इसलिए मैने मना कर दिया. तब तो मुझे कुछ नहीं कहा गया लेकिन बाद में मेरा शोषण किया गया. मुझे आर्मी कस्टडी में भी रखा गया.

जवान ने यह भी कहा कि, ‘हर जवान यही चाहता है कि मेरे देश की सेना की इज्जत सबसे ऊपर हो. लेकिन ये कब तक सहते रहेंगे. अब बात सिर्फ सहायक तक सीमित नहीं रही. बहुत कुछ गलत हो रहा है. जवानों को सिर्फ दिखावे के लिए सुविधाएं दी जाती हैं. जीवित रहने के लिए खाने भी दिए जाते है. सबसे सस्ती सब्जी, सबसे सस्ते फल और सबसे घटिया खाना दिया जाता है. अभी तो इन बातों का मेरे पास कोई सबूत नहीं है इसलिए इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा.’

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इसके साथ ही अफसरों पर आरोप लगाते हुए वीडियो में कहा, ‘सेना के कुछ ऑफिसरों ने जवानों को अपना गुलाम समझ के रखा है और जवानों को सबकुछ मजबूरी में करना पड़ता है. जो मुह खोलता है वो मारा जाता है, क्योंकि सेना का संविधान बहुत ही जटिल है. मैं नहीं चाहता था कि सेना की बात सोशल मीडिया में आए इसलिए दो बार छुट्टी लेकर प्रधानमंत्री ऑफिस और रक्षा मंत्री के ऑफिस गया. जब इसका जवाब आया तो मेरे खिलाफ अनुशासन तोड़ने का केस चलाया गया. जांच बिठाई गई और एक साल तक मेरा शोषण किया गया फिर भी मैं चुप रहा. मैनें फिर से छुट्टी ली और जनरल विपिन रावत को लेटर लिखा, जिसका कोई जवाब नहीं आया.

जवान ने कहा कि, ‘पूरी सेना गलत नहीं है, लेकिन कुछ अधिकारियों की वजह से पूरी सेना पर कीचड़ उछलता है.’