…. और गुरू दक्षिणा ?

आज्ञा दें गुरु देव-
एकलव्य बोला था
क्या दूं गुरु दक्षिणा ?

दायें हाथ का अंगूठा
द्रोण ने दहकती दृष्टि डाली
अंगूठे का क्या करेंगे
दलित एकलव्य ने पूछा था
तुम्हें प्रश्न करने हैं
कि गुरुऋण से उऋण होना ?

वर्षों की साधना,
कला और धनुर्विद्या
सब निर्थक हो जाएगी
गिड़गिड़ाया था अनार्य एकलव्य
चुप वे, नीच
उपदेश देता है, गुरु को ?

खच से अंगूठा काट
भील एकलव्य ने
ब्राह्मण गुरु को चढ़ाया
उधर कौरव-पांडव
दोनों प्रसन्न थे
गुरु द्रोण की चाल पर
क्योंकि एक बार फिर
एक चुनौती को मिटा दिया गया….?

……और गुरू दक्षिणा ?

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