नई दिल्ली: कोलकाता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सी एस कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश सहित 6 जजों को सजा सुनाई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवमानना के केस का सामना कर रहे कर्णन ने इन जजों को दलित उत्पीड़न का दोषी पाया है। कर्णन ने उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दोषी पाए जाने पर 5 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

2 मई को जस्टिस कर्णन ने संविधान के अनुच्‍छेद 226 का प्रयोग करते हुए सुओ-मोटो आदेश जारी किया था। सीजेआई व 6 अन्‍य को सम्‍मन किए जाने के बाद वह जस्टिस कर्णन के सामने पेश नहीं हुए तो उन्‍होंने गैर-जमानती वारंट जारी करते हुए 8 मई को फिर पेश होने का आदेश जारी किया था। सोमवार को जब सुप्रीम कोर्ट के जज पेश नहीं हुए तो जस्टिस कर्णन ने इसे अपनी अदालत की अवमानना मानते हुए सभी 7 जजों को 5 साल की सजा सुना दी।

विदित हो कि कर्णन ने न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रधानमंत्री से शिकायत की थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के जजों ने इस शिकायत को अपमान मान लिया और जस्टिस कर्णन के खिलाफ कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई शुरू कर दी।

उन्होंने जस्टिस कर्णन की मानसिक स्थिति की जांच का आदेश जारी कर दिया। जस्टिस कर्णन ने जबावी कार्रवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के सात जजों के खिलाफ एससी अत्याचार निरोधक अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू कर दी। आज (सोमवार) इसी मामले की सुनवाई करते हुए कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीशों को सजा सुनाई है।

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