जिका वायरस फ्लाविविरिदए परिवार का एक सदस्य है और मच्छरों के काटने से मनुष्यों में फैलता है। मच्छरों से पैदा होने वाले ज़ीका वायरस की वजह से ब्राज़ील में लगभग 4,000 बच्चों के दिमागों को नुकसान पहुंचा है। गर्भवती महिलाओं के संक्रमित होने से होने वाले बच्चे को जन्म से ही कुछ दोष आ सकते हैं।

अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने चेतावनी दी है कि जीका वायरस के कारण बच्चों में जन्मजात माइक्रोसिफेली दोष आ सकता है। इससे प्रभावित बच्चों का सिर छोटा रह जाने से उनके मस्तिष्क में स्थाई दोष आ जाता है।जीका वायरस के लक्षण –

ज़ीका वायरस से संक्रमित होने पर रोगी में आमतौर से बुख़ार, सिर दर्द, उल्टी आना, आंखों के पीछे दर्द होना, मसल्स पेन, जॉइंट पेन और स्किन रैशेज जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इनमें से एक-आध लक्षण दिखने पर भी रोगी को तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए और घरेलू उपचार से बचना चाहिए।

जीका वायरस से बचाव और उपचार के तरीके –

1. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार जीका वायरस के संक्रमण को रोकने का सबसे अच्छा उपाय है मच्छरों की रोकथाम.
2. मच्छरों से बचने के लिए पूरे शरीर को ढककर रखें और हल्के रंग के कपड़े पहनें.
3. मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए अपने घर के आसपास गमले, बाल्टी, कूलर आदि में भरा पानी निकाल दें.

4. सुगंधित त्वचा देखभाल उत्पादों के उपयोग से बचें
5. बुखार, गले में खराश, जोड़ों में दर्द, आंखें लाल होने जैसे लक्षण नजर आने पर अधिक से अधिक तरल पदार्थों का सेवन और भरपूर आराम करें.
6. जीका वायरस का फिलहाल कोई टीका उपलब्ध नहीं है. डब्ल्यूएचओ का कहना है कि स्थिति में सुधार नहीं होने पर फौरन डॉक्टर को दिखाना चाहिए.

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