हिमाचल प्रदेश में भी ‘गॉडमैन’ का राज चलता है। प्रदेश के सोलन ज़िले का गांव रूढ़ा काफी दिनों से चर्चा विषय बना हुआ है। चर्चा का कारण है यहां पर स्थापित ‘रामलोक मंदिर’ और उस मंदिर-सह-आश्रम के स्वामी ‘गोड्मेन’ बाबा अमरदेव एवं उस क्षेत्र के स्थानीय के बीच तनातनी भरे सम्बन्ध।
कुछ दिन पहले बाबा और उसके आश्रम वालों ने ज़िला सोलन के कंडाघाट के पास इस गांव की एक 54 वर्षीय महिला पर हमला करके घायल कर दिया। उनके इस कृत्य के विरुद्ध क्षेत्र के 12-14 पंचायतों के लोग उठ खड़े हुए। जिसके लिए वे प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी मिल चुके हैं और उनसे निवेदन किया गया है कि बाबा को गांव से बाहर निकाल दिया जाये।
जिस पर सरकार की तरफ से अभी तक कोई आश्वासन नहीं दिया गया है। आश्वासन देना या किसी तरह की कारवाई करना भी सरकार के लिए आसान कार्य नहीं होगा। क्योंकि बताया जाता है कि बाबा के आश्रम में आने जाने वाले अति विशिष्ट व्यक्तियों में हिमाचल प्रदेश सरकार कम से कम तीन केबीनेट मंत्रियों के अतिरिक्त कई वरिष्ठ पुलिस एवं सिविल अधिकारी भी शामिल हैं।
यह कितना महत्वपूर्ण है इस का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि बाबा अमरदेव के आश्रम में लगातार आने जाने वाले मंत्रियों व पुलिस अधिकारी को बाबा अपने ‘आन, बान, शान तथा जान’ कहता है। कंडाघाट के निकट तुंगल पंचायत के इस मंदिर-सह-आश्रम के मालिक बाबा अमरदेव के बारे में स्थानीय 22 पंचायतों के लोगों में कई संदेह हैं।
उनके असली नाम व उनके पूर्व जीवन के बारे किसी को कोई पता नहीं है। बताया जाता है कि कुछ साल पहले बाबा एक पूर्व पुलिस कन्सटेबल का शिष्य बन कर यहां आये थे। यहां तुंगल पंचायत के गांव रूढ़ा में उन्होंने 5-6 बीघा सरकारी जमीन पर नाजायज कब्जा कर लिया और एक भव्य मंदिर का निर्माण किया। मंदिर निर्माण पर हो रहे खर्चे के स्रोत्र पर भी संदेह किया जा रहा है।
इस बीच बाबा अमरदेव ने इस स्थान का नाम मंडी शहर की तर्ज़ पर ‘छोटी अयोध्या’ दिया है, क्योंकि पुरानी मण्डी और आसपास के क्षेत्र में बहुत से प्राचीन मंदिर होने के कारण उसे ‘छोटी काशी’ कहा जाता है। बाबा अमरदेव और उनका रामलोक मंदिर-सह-आश्रम गत वर्ष तब चर्चा में आया जब राज्य पुलिस की सीआईडी ने आश्रम पर छापा डाल कर वहां से जंगली जानवरों की चार खालें बरामद की थी।
उन खालों को फोरेंसिक जांच के लिए ‘भारतीय वन्य प्राणी संस्थान (डब्लयूआईआई) देहरादून भेजा गया था। जिसकी रिपोर्ट अभी आई है और संस्थान ने चार में से तीन खालों को चीतों की खाल प्रमाणित कर दिया है और चौथी की जांच चल रही है। इस अपराध के लिए बाबा अमरदेव पर ‘वन्य प्राणी सुरक्षा अधिनियम-1972 की धारा 5(बी) के अन्तर्गत मुकदमा चलाया जायेगा।
बाबा के इस प्रकार के संदेहजनक क्रियाकलापों को देखते हुए क्षेत्र के 22 पंचायतों जिनमें दो पंचायतें ज़िला शिमला तथा शेष सोलन ज़िले की हैं, ने बाबा अमरदेव के गैर कानूनी कार्यों के विरोध करने के लिए एक संयुक्त कार्य समिति का गठन किया है। जिसमें यह निर्णय लिया गया है कि बाबा को गांव में प्रवेश करने नहीं दिया जायेगा।
इस बारे में समिति के लोग मुख्यमंत्री को सूचित कर चुके हैं। समिति के लोगों ने यह भी मांग की है कि आश्रम और बाबा अमरदेव के बारे गहराई से छानबीन की जाये। स्थानीय लोगों को इस बात की शिकायत है कि बाबा को राज्य मुख्यमंत्री समेत अन्य कई वीआईपी लोगों का आशीर्वाद प्राप्त है।
अब क्योंकि बाबा जी राज्य के मुख्यमंत्री को ‘बच्चू’ कह कर पुकारते हैं, इस लिए वह बाबा जी से मिलने के लिए ‘ताजे फूलों’ का गुलदस्ता लेकर अस्पताल पहुंचे। बाबा जी ने उनका हाथ पकड़ कर कहा ‘तू सुन रहा है न, बच्चू, जिसने भी मेरा विरोध किया है, उन सब को सजा मिलनी चाहिए।‘ कुछ ही समय में गांव के 7 व्यक्ति सलाखों के पीछे थे और एसएचओ समेत कंडाघाट पुलिस स्टेशन का 23 पुलिसकर्मियों का पूरा स्टाफ बदल दिया गया। जब कि हमले में घायल हुई महिला शांति देवी जिसे 43 टांके लगे का हाल तक नहीं पूछा।