Sadprayas

तुम और मैं

तुम बोलते हो जब
तो
मुझे अपनी आवाज़ का
आभास होता है।

तुम्हारी सांसों से
उभरते-पिचकते
सीने को देख
अपने ज़िंदा होने का
एहसास होता है।

तुम्हारे दौड़ कर
मेरे आगे से
निकल जाने पर
मुझे लगता है
मेरे पैरों में भी
जान है।

तो फिर
कैसे कह दूं
कि
तुम और मैं
अलग-2 हैं
तुमने कैसे कह दिया
कि
तुम्हारे बिना, मैं
ज़िंदा रह सकता हूं
और
मेरे से अलग
अस्तित्व तुम्हारा है?     शमशी- 21.1.92

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