नई दिल्ली. विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत के बाद उत्तर प्रदेश की कमान योगी आदित्यनाथ के हाथ में दी गयी. वहीं मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद योगी आदित्यनाथ ने सम्मेलन में, ‘राज्य में सबका साथ, सबका विकास’ के एजेंडे के साथ काम करने का वादा दोहराया. उन्होंने सभी मंत्रियों को 15 दिनों में संपत्ति का ब्योरा देने को कहा है. इसके साथ ही उन्होने कैबिनेट मंत्रियों को अनाप-शनाप बयान से बचने की नसीहत भी दी.
खबर है कि मुख्यमंत्री योगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा दिए हुए वादे को पूरा नहीं कर पाए. गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि, ‘कैबिनेट की पहली बैठक में ही किसानों का कर्ज माफ कर दिया जाएगा,’ लेकिन ऐसा कुछ नही हुआ. कैबिनेट की पहली बैठक में सबकी निगाहें इसी बात पर टिकी रहीं कि शायद योगी इस मामले में कोई घोषणा करेंगे, लेकिन किसानों को मायूसी ही हाथ लगी.
खबरों के मुताबिक कैबिनेट बैठक के पहले जब संवाददाताओं ने उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने कहा था कि, ‘देखना होगा कि कोई कानूनी अड़चन तो नहीं आ रही है.’ वहीं कैबिनेट बैठक होने के बाद जब सीएम योगी ने इस मुद्दे पर कुछ भी स्पष्ट नहीं किया. सिर्फ इतना कहा कि, ‘सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ एजेंडे पर काम करेगी.’
खबर ये भी है कि मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने भाजपा के शपथग्रहण समारोह को ऐतिहासिक दिन बताते हुए कहा कि, ‘भाजपा सरकार लोक कल्याण संकल्प पत्र 2017 में किए गए सभी वादों को पूरा करेगी. मैं राज्य की जनता को यह आश्वस्त करता हूं राज्य सरकार उत्तर प्रदेश को विकास और खुशहाली के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ाने के लिए सभी प्रभावी कदम उठाएगी.’ ऐसे में यह देखना होगा कि सरकार प्रधानमंत्री द्वारा दिए हुए वादे को कब पूरा करेगी?
प्रधानमंत्री द्वारा दिए हुए वादे
खबरों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 मार्च को जौनपुर रैली के दौरान कहा था कि, ‘होली के बाद नई सरकार बनेगी और सकरार बनने के बाद उसकी पहली मीटिंग मैं यूपी के सांसद के नाते आप लोगों को विश्वास दिलाता हूं कि किसानों के कर्ज को माफ करने का निर्णय लिया जाएगा.’ इसी बीच केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने शुक्रवार को लोकसभा में कहा कि, ‘उत्तर प्रदेश में नई भाजपा सरकार राज्य के किसानों का कर्ज माफ करेगी और कर्ज माफी का बोझ केंद्र सरकार उठाएगी.’