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टॉयलेट-एक प्रेमकथा फिल्म नहीं, सरकारी विज्ञापन है

आजकल देश में सबसे बड़े देशभक्त के रूप में मशहूर बॉलीबुड अभिनेता अक्षय कुमार अपनी नयी फिल्म टॉयलेट एक प्रेमकथा को लेकर चर्चा में हैं। इस फिल्म में एक गावों में महिलाओं के खुले में शौच जाने और उनके लिए शौचालय बनाने में आड़े आने वाली संस्कृति को दिखाया गया है। फिल्म की पटकथा और संपादन ठीक है लेकिन फिल्म को देखते हुए ये महसूस होता है कि आप कोई बॉलीवुड की फिल्म नहीं बल्कि एक सरकारी विज्ञापन देख रहे हैं।

स्वच्छता को थीम लेकर बनायीं गयी इस फिल्म में वर्तमान सरकार के कामों का भरपूर प्रचार किया गया है। एक डायलाग में तो बाकायदा प्रधानमंत्री का नाम तक ले लिया गया है जो बेवजह का लगता है। क्यूंकि आज तक इस तरह की फिल्म जो सत्तासीन सरकार का गुण गान खुल कर करे देखी नहीं गयी है। वैसे अक्षय इसमें माहिर है तभी तो उनको एक देशभक्त एक्टर का तमगा मिला है और कुछ दिन पहले तो वो ऐसी ही देशभक्ति फिल्म के लिए नेशनल अवार्ड भी ले चुके हैं। चौंकिएगा मत जब ये फिल्म भी कई नेशनल अवार्ड जीत ले जाए। इस फिल्म को कई राज्यों में टैक्स फ्री कर दिया गया है व कई पचायतों में तो इसको दिखाया जाना अनिवार्य भी किया गया है।

एक सीन में एक्टर आंकड़े देते हुए दिखते हैं और कहते हैं की पिछले तीन सालों में इस सरकार ने फलां फलां नंबर के शौचालय भी बना दिए हैं जो की सीधा-सीधा सरकार का प्रमोशन लगता है। अब जनता इतना पैसा खर्च करके मनोरंजन देखने जाती है तो उसे एंटरटेनमेंट की चाशनी में राजनीती का पकवान परोसा जाता है। वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फिल्म में देश के सबसे बड़े स्वयंभू राष्ट्रवादी न्यूज़ चैनल ज़ी न्यूज़ की माइक आईडी भी दिखाई देती है।

फिल्म के एक दृश्य में तो एक एक्टर खुले तौर पर ये कह देता है कि जब प्रधानमंत्री देश की भलाई के लिए नोटबंदी का फैसला ले सकते हैं तो हम भी कड़े फैसले ले सकते हैं। हालांकि अभी तक कोई भी सरकारी एजेंसी ये साबित नहीं कर पायी है कि नोटबंदी से देश को क्या और कितना फायदा हुआ है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री का 15 अगस्त को दिया गया वो भाषण भी शामिल है जिसमें टैक्स भरने वालों की संख्या में इजाफे के आंकड़े खुद प्रधानमंत्री ने दिए थे जोकि बाद में सवालों के घेरे में आ गए। More Movies.

फिल्म देखते देखते ये समझ नहीं आता कि ये अगर फिल्म नहीं सरकारी विज्ञापन है तो जनता इसको देखने के लिए पैसे क्यों दे। क्यूंकि कायदा तो ये कहता है की सभी सरकारी विज्ञापन लोगों तक एक दम मुफ्त पहुंचेंगे तो इस फिल्म को भी सरकार को अपने विज्ञापन में शामिल कर लेना चाहिए। दूसरा सवाल ये उठता है कि सरकार खुद विज्ञापन बना कर अपने कामों का प्रचार-प्रसार नहीं कर सकती है क्या ?

इस फिल्म का विरोध भी शुरू हो गया है और अक्षय कुमार अब ये कह रहे हैं कि ये फिल्म प्रोपेगंडा नहीं है।

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