काश! मेरा यह कहना- “अदृश्य शत्रु से अंधेरे में लड़ रहा हूं यह जानते हुए कि हर भस्मासुर के लिए कोई शिव जिम्मेदार होता है मैं बेबस नहीं हूं।” गलत साबित हो जाये। लगता है ऐसा नहीं होगा। क्योंकि अभी तक कोरोना ( Corona Virus) पर जो और जितनी भी सूचनाएं सांझा की जा रही हैं, उनमें पारदर्शिता बरती जा रही है ऐसा नहीं लगता।
कोरोना के बाद आम आदमी के सामने की बड़ी चुनौती
हर देश और सरकार उतनी ही सूचनाएं सांझा कर रही हैं जितनी उनके हित में हैं। इसके अतिरिक्त भी एक देश दूसरे देश पर, एक कौम दूसरी पर कोरोना (COVID 19)की ज़िम्मेदारी डाल रहा है। दुनिया भर की सरकारें अमेरिका (America) और चीन (China) के खेमों बंटती हुई दिख रही हैं। यहां तक कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को भी विवादों में घसीटा जा चुका है।
गरीब का भूखा पेट, अमीर का सेनीटाइजर
अपने यहां भी कोरोना को धर्म के आधार पर बांट कर देखा गया। अब तो बताया जा रहा है कि कोरोना (Corona) एक आर्थिक षड्यंत्र का हिस्सा है। यह भी बताया जा रहा है कि विश्व के बड़े मानव-प्रेमी (Philanthrope) और शोध संस्थान ‘कोविड-19’ (COVID 2019) के वेक्सीन बनाने के कई उद्योग लगा चुके हैं।
