पर्यावरण एक चिन्तनीय विषय है, औपचारिकता नहीं। पर्यावरण कोई बाज़ारी वस्तु नहीं, जीवन की अनिवार्यता है। आज के व्यवसायी युग में हर वस्तु की तरह…
वन कटते गए वन कटते गए धरती नंगी होती गई पत्थर, लोहे, सीमेंट और कंकरीट की संस्कृति फैलती गई। कल तक जो धरती वस्त्र-आभूषणों…