26 दिन बाद सोनम वांगचुक ने तोड़ा अनशन | प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक चले अपने अनशन को शुक्रवार को समाप्त कर दिया। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात के बाद उन्होंने अपना अनशन तोड़ने का फैसला लिया।
अनशन समाप्त होने के बाद सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इसकी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, डॉ. जितेंद्र सिंह और लेह-लद्दाख की एपेक्स बॉडी के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ सकारात्मक बातचीत हुई, जिसके बाद उन्होंने अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया।
एक्स पर क्या लिखा सोनम वांगचुक ने?
सोनम वांगचुक ने एक्स पर लिखा,
“अभी-अभी केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह व लेह-लद्दाख की ‘एपेक्स बॉडी’ के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ सार्थक बातचीत हुई। सरकार की ओर से मिले सकारात्मक आश्वासन और आगे भी संवाद जारी रखने की सहमति के बाद मैंने अपना 26 दिनों का अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया है।”
उन्होंने अपने समर्थकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आगे भी जारी रहेगा तथा लद्दाख के लोगों के हितों की रक्षा के लिए संवाद का रास्ता अपनाया जाएगा।
क्यों चर्चा में था यह अनशन?
सोनम वांगचुक ने 28 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में आमरण अनशन शुरू किया था। यह आंदोलन प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेषकर नीट (NEET) समेत विभिन्न भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही और व्यापक शिक्षा सुधार की मांग को लेकर शुरू हुआ था। आंदोलनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग कर रहे हैं। वांगचुक का कहना था कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार को ठोस और जवाबदेह कदम उठाने चाहिए। उनके अनशन ने देशभर में चल रहे इस छात्र आंदोलन को नई ऊर्जा और व्यापक समर्थन दिया।
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मेदांता अस्पताल में स्वास्थ्य पर रखी गई नजर
लगातार 26 दिनों तक अनशन करने के कारण सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर चिकित्सकों की विशेष निगरानी रखी जा रही थी। अनशन समाप्त करने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें धीरे-धीरे सामान्य आहार लेने और कुछ समय तक चिकित्सकीय देखरेख में रहने की सलाह दी है।
कौन हैं सोनम वांगचुक?
सोनम वांगचुक लद्दाख के प्रसिद्ध इंजीनियर, नवप्रवर्तक (Innovator), शिक्षा सुधारक और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वे SECMOL (Students’ Educational and Cultural Movement of Ladakh) के संस्थापक हैं। वर्ष 2018 में उन्हें रैमोन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
अब आंदोलन का क्या होगा?
सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त होने के बाद अब सभी की निगाहें ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)’ के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन पर होंगी। दिल्ली के जंतर-मंतर सहित देश के कई हिस्सों में शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी है।
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने संकेत दिए हैं कि सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त होने के बावजूद आंदोलन खत्म नहीं होगा। उनका कहना है कि जब तक छात्रों की मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती और जवाबदेही तय नहीं की जाती, तब तक देशभर में शांतिपूर्ण विरोध जारी रहेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में आंदोलन की दिशा और सरकार की प्रतिक्रिया पर सभी की नजर रहेगी।