देश के सर्वोच्च न्यायालय ने पहली बार तथाकथित ‘लव जेहाद’ के मामले की सुनवाई की। ये मामला केरल का है, जिसमें हिंदू लड़की को बहला-फुसलाकर शादी करने का आरोप है। केरल हाईकोर्ट लव जेहाद का मामला बता कर इस शादी को रद्द कर चुकी है। वहीं, शादी रद्द किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हिंदू लड़की के पति जो कि मुस्लिम समुदाय के है, का कहना है कि उसकी पत्नी(पूर्व) बालिग है और किसी से भी शादी करने के साथ ही किसी भी धर्म को मानने के लिए स्वतंत्र है। इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए को जांच करने का आदेश दिया है और कहा कि वो 10 दिनों के अंदर जरूरी सबूत पेश करे। सुप्रीम कोर्ट ने लड़की के पिता को भी आदेश दिया है कि वो 10 दिनों के भीतर ऐसे कागजात प्रस्तुत करे, जिससे ये साबित हो कि लड़की को बहला-फुसलाकर शादी कराई गई है।
इस मामले को केरल हाईकोर्ट ने लव जिहाद का मामला बताते हुए शादी को रद्द घोषित कर दिया था। और महिला को उसके पिता के पास भेज दिया था। सुप्रीम कोर्ट में युवक ने अपने वकील कपिल सिब्बल और इंदिरा जयसिंह के जरिए अपील की कि उसकी पत्नी(पूर्व) बालिग है और किसी भी धर्म को मानने के साथ ही किसी भी व्यक्ति से शादी करने को स्वतंत्र है।
इसके बाद दोनों वकीलों ने दलील दी कि केरल हाई कोर्ट ने शादी रद्द करने का आदेश दिया और पति को पत्नी से मुलाकात करने तक पर रोक लगा दी है। इस आदेश पर सुप्रीम कोर्ट जांच कराए। उन्होंने लड़की के बयान दर्ज कराने की भी मांग की की।
दरअसल, हिंदू लड़की के तीन नाम सामने आए हैं। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले को संदिग्ध माना है और एनआईए से सबूत जमा करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि कोई युवती 24 की उम्र में ऐसे काम नहीं कर सकती, इसलिए सच्चाई सामने आनी चाहिए। इस मामले की अगली सुनवाई 14 अगस्त को होगी।