रांची: कांके थाना क्षेत्र के अरसंडे में सच्चिदानंद झा समेत सात लोगों की मौत के मामले की जांच जारी है। बुधवार को सच्चिदानंद झा के छोटे भाई केएन झा समेत पूरा परिवार कांके थाना पहुंचा एवं पुलिस से मामले की जानकारी ली।

पोस्टमार्टम की कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद केएन झा सातों शवों को अंतिम संस्कार के लिए हरमू मुक्तिधाम ले गए। सच्चिदानंद झा के छोटे भाई केएन झा ने मुखाग्नि दी। इससे पूर्व सातों के बॉडी को देख खुद को रोक न सके। पोस्टमार्टम के बाहर लोहे के खंभे को पकड़ कर फफक-फफक कर रोने लगे। रिश्तेदारों ने उन्हें सहारा देकर शांत कराया। झा परिवार के सात लोगों के शव को पोस्टमार्टम से लेकर अंतिम संस्कार करने तक मिथिला मंच के कई सदस्य मौजूद थे।

मनोज मिश्र के नेतृत्व में मिथिला मंच के लोग पीड़ित परिवार की मदद के लिए खड़े थे। वहीं परिवार में केएन झा के अलावा उनकी पत्नी, कोलकाता से भतीजा नीरज कुमार झा, नीरज की पत्नी, नीरज की मां, रांची से नातिन और उसके पति रिम्स में मौजूद थे।

अरसंडे में दो दिन पूर्व एक ही परिवार के सात लोगों ने आत्महत्या कर ली थी। हरमू मुक्तिधाम में एक साथ सातों शव का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान शवों को मुखाग्नि देते परिजन। मौके पर झारखंड मिथिला मंच के सदस्यों ने भी योगदान दिया

मीडिया से बातचीत में दीपक झा के चाचा केएन झा ने कहा कि परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी भी दयनीय नहीं थी कि पूरा परिवार आत्महत्या कर ले। जहां तक मुङो ध्यान है कि सच्चिदानंद को रिटायर होने पर 16 लाख और जमीन बेचने से चार लाख रुपये मिले थे। कुल 20 लाख रुपये हुए। इतने पैसे दो-तीन साल में कहां खर्च हो गए। यह सवाल सोचने वाला है। इस बिंदु पर भी पुलिस को तफ्तीश करनी चाहिए।

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दुनिया का सबसे गरीब इंसान भी परिवार के लिए मेहनत कर पैसा कमाता है और परिवार ठीक से चलाने की कोशिश करता है। अगर पूरे परिवार ने आत्महत्या की है, तो घर का दरवाजा खुला क्यों था। पुलिस पूरे मामले की ठीक से जांच करें, ताकि मौत कैसे हुई इसका पटाक्षेप हो सके

झा ने कहा कि जरूरत पड़ने पर सरकार को इस मामले की सीबीआइ से भी जांच करानी चाहिए। वह इस मामले को लेकर पुलिस प्रशासन के वरीय अधिकारियों से मिलकर अपनी बात रखेंगे। इस घटना ने हमारे परिवार के साथ-साथ समाज के लोगों को भी झकझोर दिया है।’

साभार: जनसत्ता