बॉलीवुड के सबसे पॉपुलर कलाकारों में से एक सलमान खान की फिल्म ट्यूबलाइट बीते शुक्रवार को रिलीज़ हो गयी है। ईद के मौके पर रिलीज़ इस फिल्म को प्राप्त जानकारी के अनुसार अच्छी ओपनिंग मिल रही है। विशेषता के तौर पर देखें तो इस बार ये फिल्म ज़रा सी आज के दौर को छूकर निकलने वाली फिल्म है। कबीर खान, सलमान खान की जोड़ी ने मिलकर देश की मौजूदा हालत पर एक तंज कसा है कि कैसे भारत में रहने की लिए वक़्त-वक़्त पर आपको अपनी देशभक्ति साबित करने की जरूरत पड़ रही है।

फिल्म 1962 के इंडिया-चाइना युद्ध की पृष्भूमि में है। जहां हिंदुस्तान के किसी गावों में चीन से आया एक परिवार तीन पीढ़ियों से रहता है वो खुद को हिंदुस्तानी मानते हैं लेकिन युद्ध के बाद स्थिति बदल जाती है। उन्हें अपनी देशभक्ति साबित करने के लिए बाध्य किया जाता है। हालांकि ये फिल्म की मुख्य कहानी नहीं है। लेकिन इस बात को मजबूती से फिल्म में रखा गया है कि कैसे आज भारतीय के भारतीय होने पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। ऐसे ही एक सीन में सलमान चीन से आये उस परिवार के बच्चे को “भारत माता की जय” कहने पर मजबूर करता है और कैसे वो बच्चा सलमान से भी ऊंची आवाज़ में भारत माता की जय बोलता है और कहता है की अब तुमसे बड़ा देशभक्त मैं साबित हुआ। ये एक बेहतरीन सीन है।

इसके बाद एक और सीन में कबीर खान ने आजकल देशभक्ति की चल रही दुकानों पर प्रहार किया है। चाइना से आयी महिला को भीड़ द्वारा अपना हिंदुस्तान से प्यार साबित करने को कहा जाता है। वो बुलंद आवाज़ में कहती है कि मुझे हिंदुस्तानी होने के लिए तुम्हारे सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है।इस फिल्म में ये सीन डालना कहीं न कहीं डायरेक्टर की एक मंशा थी कि आज भारत की बिगड़ रही स्थिति को दिखाया जाये, उसको किसी और परिदृश्य में सामने लेकर रखा जाये।

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फिल्म जो कि एक हिंदुस्तानी फौजी के 1962 के युद्ध में गुम हो जाने और उसके भाई की उसको वापिस लाने की कहानी है, इसके इतर चलती रहती है। हालांकि फिल्म के दर्शकों की ये राय है की बेवजह फिल्म को खींचा गया है। लेकिन शायद डायरेक्टर जो सन्देश देना चाहता था वो कम्यूनिकेट होता है। निश्चित तौर पर ये फिल्म देशभक्ति के नाम पर दुकान चला रहे संगठनों को गले नहीं उतरेगी।

एक सीन में शाहरुख खान भी दिखते हैं। जिन पर कुछ वक़्त पहले देशद्रोही होने के आरोप लगाए गए थे और राइट विंग के लोगों ने उनकी फिल्मों का बहिष्कार करने की घोषणा की थी।

इस फिल्म की एक और सुखद बात है बेहतरीन कलाकार ओम पूरी को आखिरी बार परदे पर देखना। इस फिल्म को पूरी की आखिरी फिल्म के तौर पर याद किया जायेगा।