हिमाचल प्रदेश के कोटखाई में हुए जघन्य अपराध की जांच सीबीआई करेगी। वीरभद्र सिंह सरकार ने गुड़िया मर्डर केस में सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी है। इससे पहले पूरे मामले की जांच की प्रगति रिपोर्ट सरकार ने स्वयं देखी और उसके बाद सीबीआई जांच की सिफारिश की है। बता दें कि एसआईटी द्वारा बहुचर्चित गुड़िया रेप और मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने का दावा करने के 24 घंटे के भीतर लोगों का आक्रोश सामने आ गया है।
मामले में पुलिस द्वारा आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद लोग भड़क गए हैं। लोगों को पुलिस की थ्योरी रास नहीं आई रही है। पुलिस की जांच से नाराज लोग लगातार सीबीआई जांच की मांग कर रहे थे। ठियोग बाजार में हंगामा किया और पत्थरबाजी भी की।
बताया जा रहा है कि पुलिस के डरे हुए अफसर बात करने से भी पीछे हट रहे हैं। लोग CBI को केस देने की घोषणा करवाने पर अड़े थे। वहीं विपक्ष ने भी सरकार पर इस मामले को लेकर संगीन आरोप लगाए हैं। इसी बीच प्रदेश सरकार के एक मंत्री ने भी सीबीआई जांच की वकालत कर दी थी।
परिवहन मंत्री जीएस बाली ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा था कि जनता के भरोसे और विश्वशनीयता को कायम रखना हर सरकार की प्रथम जिम्मेवारी है। सरकार किसी को बचाना भी नहीं चाहती। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए सरकार और सीएम से मैं अनुरोध करता हूं कि जनभावनाओं को देखते हुए मामले को सीबीआई या मैजिस्ट्रेट इन्क्वारी को सौंपने के बारे में निर्णय लेना चाहिए।
बाली ने कहा कि कोटखाई प्रकरण ने प्रदेश की जनता को आक्रोशित किया है। प्रदेश के इतिहास में पहली बार देवभूमि के शांत रहने वाले हजारों लोग सड़कों पर उग्र रूप से शासन और प्रशासन के खिलाफ उतर आए हैं। हालांकि SIT ने इस मामले को सोल्व कर लिया है परंतु दिवंगत बेटी के पेरेंट्स और प्रदेश की जनता कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है और सीबीआई जांच की मांग कर रही है।
गुड़िया मर्डर केस में सीएम वीरभद्र सिंह ने कहा है कि सीबीआई जांच करवाए जाने की मांग राजनीतिक तौर पर संगठित मांग थी, फिर भी मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मामला सीबीआई को सौंपने का निर्णय लिया है। साथ ही उन्होंने विरोधी पार्टियों को भी आड़े हाथ लिया और कहा कि विरोधी पार्टियां मामले का राजनीतिक फायदा उठाना चाहती हैं।
मासूम को इंसाफ मिलना चाहिए पर कुछ लोग मासूम के शव के ऊपर राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। डीजीपी की अध्यक्षता वाली जांच टीम ने इस मामले को क्रैक कर दिया था। कुछ लोगों को छानबीन के बाद गिरफ्तार किया गया था। जब उनको शिमला लाया था तो संगठित भीड़ ठियोग में इकट्ठा हो गई, जिस वजह से गिरफ्तार किए आरोपियों को शिमला लाने में परेशानी हुई। इस बीच लोगों ने सीबीआई जांच की मांग की थी। जो भी जांच की गई थी अनुभवी लोगों के द्वारा की गई थी, जिसमें डीजीपी शामिल थे।
क्या है मामला
हिमाचल प्रदेश के जिला शिमला के कोटखाई की छात्रा को लिफ्ट देकर 5 दरिंदों ने उसके साथ हैवानियत की सारी हदें पार दीं। दरिंदों ने उसे मरने के बाद भी नहीं छोड़ा। हैवानियत भी ऐसी कि आपकी भी रूह कांप जाएगी। आरोपियों ने पुलिस के सामने किए खुलासे में बताया कि वारदात के दिन राजेंद्र सिंह अपनी गाड़ी में चार दोस्तों के साथ कहीं जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में उन्हें दसवीं की यह छात्रा मिल गई जोकि राजेंद्र को पहले से जानती थी। गाड़ी रोकने पर छात्रा उसमें बैठ गई। मगर आगे जो हुआ वह रूह कंपा देने वाला था।
आरोपियों ने बताया कि आगे जाकर उन्होंने जंगल में गाड़ी रोक दी और सामान उतारने के बहाने वे गाड़ी से नीचे उतर गए। उन्होंने एक-दूसरे से बात की कि यही मौका है और ऐसा मौका दोबारा नहीं मिलेगा। वहीं गाड़ी में बैठी छात्रा इस सबसे अनजान थी। थोड़ी ही देर बाद वे वापस गाड़ी के पास लौटे और छात्रा को बाहर उतरने के लिए कहा। जब वह नहीं उतरी तो उन्होंने जबरदस्ती उसे बाहर घसीट लिया। इससे उसके कपड़े तक फट गए। कुछ पिन और कपड़े के टुकड़े भी वहां गिर गए।
इन कारणों से सवालों के घेरे में आई थी जांच
गुड़िया प्रकरण में पुलिस की थ्योरी चंद घंटों में ही पलट गई थी। पहले स्थानीय निवासी आशीष चौहान उर्फ आशु की गिरफ्तारी दिखाई गई। कहा गया कि यह घटना में अहम कड़ी है मगर चंद घंटे बाद ही पांच अन्य लोगों की गिरफ्तारी हो गई।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब पुलिस के पास जानकारी थी कि आशु मुख्य आरोपी नहीं है, तो वीरवार की सुबह 11 बजे तक सिर्फ उसे गिरफ्तार क्यों दिखाया गया? केस में अगर 55 घंटे की तफ्तीश थी और पुलिस शुरू से सही दिशा में काम कर रही थी तो सभी छह आरोपियों की गिरफ्तारी एक साथ क्यों नहीं दिखाई गई?
सिर्फ आशु की गिरफ्तारी का खुलासा करने की क्या जल्दी थी? क्या तब तक नेपाली थ्योरी सामने नहीं आई थी? पुलिस की ओर से दिखाई गई जल्दबाजी सवालों के घेरे में है। जबकि कन्फेशन के अलावा और कोई ठोस सबूत उसके हाथ में नहीं। रसूखदार लोगों को छोड़ पुलिस नेपाली मूल के लोंगो को आरोपी बनाएगी इसकी आशंका शुरू से व्यक्त की जा रही थी।
मुंह दबा कर जंगल में ले गए दरिंदे
आरोपी उसका मुंह दबा कर उसे जंगल में ले गए, जहां कंटीली झाड़ी में उसके कपड़े फाड़कर फैंक दिए। झाडिय़ों के घाव तक छात्रा के पीठ पर लग गए। वह चिल्लाने की कोशिश करती मगर नशे में धुत्त दरिंदे नहीं माने। छात्रा के शरीर पर 3 जगह दांतों से काटने तक के निशान मिले हैं। हैवानियत की हदें पार करते हुए इन्होंने बारी-बारी उससे गैंगरेप कर डाला। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने बताया कि इस दौरान उन्होंने छात्रा का मुंह दबा रखा था, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस अंदेशा जता रही है कि छात्रा से मरने के बाद भी रेप किया गया। इसके बाद उसे वहीं नग्न हालत में फैंककर फरार हो गए थे।
केस में 6 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी
गौर रहे कि इस मामले में पुलिस कुल 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। जिनमें से एक आशीष चौहान कोटखाई का ही है जबकि एक आरोपी मंडी के जंजहैली का है। बाकी दो आरोपी नेपाली और दो आरोपी गढ़वाली हैं। प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप है कि मामला हाई प्रोफाइल लोगों से जुड़ा है। ऐसे में पुलिस दबाव में काम कर रही है।
निर्भया बनाम गुड़िया मामला
हिमाचल की जनता में इस केस को लेकर बढ़ते आक्रोश और मैन स्ट्रीम मीडिया में खबर की अनदेखी ने सोशल मीडिया में लोकतंत्र के चौथे सतम्भ पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां दिल्ली में हुए निर्भया मामले को पुरे देश की मीडिया ने अपने प्राइम टाइम में खूब जगह दी थी वहीं उसी के समकक्ष गुड़िया मामला बड़े खबरी चैनलों की टिकर में भी जगह नहीं पा सका। दुर्लभ राज्य हिमाचल के लोगों में इस अनदेखी को लेकर काफी रोष है। फिलहाल सी बी आई की जांच कुछ रहत देती नज़र आ रही है।