भाषा एवं संस्कृति विभाग हिमाचल प्रदेश द्वारा प्रकाशित एक पुस्तक- ‘हिमाचल प्रदेश स्थान नाम व्युत्पतिजन्य विवेचनात्मक अध्ययन’ जिसे मेरे एक मित्र डा. विद्या चंद ठाकुर ने संपादित किया था। जिसमें हिमाचल प्रदेश के स्थानों के नामों की उत्पति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई हैं, कल अचानक हाथ लग गई। काफी बड़ी पुस्तक है और 175 रुपये उसका मूल्य है। जिज्ञासावश पुस्तक को ऊपरी तौर पर एक नज़र से देखा तो लाहौल के स्थानों विशेषकर पट्टन घाटी के बारे में कुछ अधिक नहीं पाया। लेकिन जितना देखा तो लगा कि उस पुस्तक के सम्पादन में कुछ अधिक ही पौराणिकता लाने का प्रयास किया गया है। हो भी क्यों नहीं, यहां पूरे देश के इतिहास को दुबारा लिखने तथा समस्त स्थानों के नाम बदलने की तैयारियां चल रही हैं तो इस प्रकार के प्रयास तो स्वाभाविक लगते हैं।

इसलिए इस बात को अपनी नैतिक ज़िम्मेदारी समझ कर कि लाहौल की पट्टन घाटी जहां मेरे समुदाय का अधिक बसेरा है, के क्षेत्र तथा गांवों के नाम लिख रहा दूं ताकि रिकार्ड रहे, अन्यथा इस पर पता नहीं किस नए इतिहासकार की नज़र पड़ जाये। महत्वपूर्ण इसलिए भी है कि मेरा विश्वास ‘सामानांतर-सह-अस्तित्व’ पर आधारित ‘समाज-विविधता’ वाली व्यवस्था- की स्थापना पर है। जिससे कि सामाजिक-आर्थिक और राजनैतिक समानता का समाज बन सके।

यह पठन सामग्री यानि पट्टन के स्थानों के नामों की सूची इतिहास, समाज शास्त्र, नृविज्ञान, राजनीति शास्त्र तथा भाषा विज्ञान के उन विद्वानों, शोधार्थियों, जिज्ञासुओं के लिए उपयोगी हो सकती है। जो उपरोक्त विषयों के अतिरिक्त स्थानों, क्षेत्रों और गांवों के नामों की उत्पति (Genesis) में विशेष रुचि रखते हैं उनके लिए तो और अधिक उपयोगी व सहायक हो सकती है। । यहां पर यह कह देना भी आवश्यक है इस प्रकार की आधार सामग्री पर निष्पक्ष होकर निष्कर्ष निकाले जाने चाहिए।

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1 पट्टन घाटी जो लाहौल की एक निचली घाटी है और हिन्दू, बौद्ध धर्मों, मंगोल, आर्य प्रजातियों तथा संस्कृत परिवार और भोटी परिवार की भाषाओं का संयुक्त क्षेत्र है। इसका फैलाव तांदी गांव से तिन्दी गांव तक है।

2 इन स्थानों एवं गांवों के नामों को भाषा परिवार के अनुसार दिया है। जिसमें संस्कृत परिवार की भाषाएं ‘चिनलभाशे’ और ‘ल्वहरभाशे’ तथा भोटी परिवार की भाषा जिसे भारतीय भाषा लोक सर्वेक्षण में‘पट्टनी’ नाम दिया गया है और जो लाहौल में सबसे अधिक समझी व बोली जाती है।

3 कुछ शब्दों के लिए वर्ण अक्षर नहीं मिले उसके लिए क्षमा करें और आप के हवाले उसकी खोज।

यह लेख मेरी प्रकाशनाधीन पुस्तक ‘लाहौल-स्पिती-1’ के एक अध्याय का एक अंश है।

क्रम      हिन्दी/राजस्व        चिनलभाशे      ल्वहरभाशे       पट्टनी

1          पट्टन                        बेहांरि            बेहांरि           लोक्सा

2          पट्टन                       गुनम            गुनम              गुनम

3          पट्टन                      बुनहांरि          बुनहांरि        चङसा

4          घुशाल                    घुश:             घुश:             गुड्रूङ

5          तांदी                     तंहति            तहनि             तङदि

6          ठोलंग                  ठोङ            ठोड़ोङ           ठोड़ोङ

7          लोट                    लोट:            लोट:                लोप्पे

8          शांशा                  शंश:            शांशे                श्रङमे

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9         जोबरंग                जोबरुङ         ज़ोबरूङ       योबरंङ

10        जाहलमा             जहमा            ज़इमे              यम्बे

11        जुण्डा                 जुहं:               ज़ुहं:                योम्बे

12        नालड़ा              नलड़ा              नलह               नलङ

11        किशोरी             किशोरि           किशोरि            खेरिङ

12      त्रिलोकनाथ/तुंदे        तुन्ने            तुन्ने                  ओइनुङ

13        हिन्सा                हेन्स:               हेन्स                 मेजङ

14        मशादी               मशाये           मशाये                मशद्दि

15        उदयपुर           मरकुलि          मरकुलि              मरगुल

16        मडग्रां               मण्ङा            मण्ङा                  मडुङ

 

लाल चन्द ढिस्सा

सामाजिक कार्यकर्त्ता