भारत में ही बने हल्के लड़ाकू विमान तेजस से शुक्रवार (12 मई) को हवा से हवा में मार करने वाली बियोंड विजुअल रेंज (बीवीआर) डर्बी मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया। तेजस से किया गया यह परीक्षण राडार मोड में किया गया। मिसाइल ने मानव दृष्टि से नजर आने वाली दूरी से कहीं आगे जाकर लक्ष्य पर सटीक निशाना लगाया और यह परीक्षण सभी मानदंडों पर खरा उतरा। मिसाइल का परीक्षण उड़ीसा के चांदीपुर परीक्षण रेंज से किया गया। इस दौरान परीक्षण रेंज में लगे सेंसरों ने लक्ष्य और मिसाइल दोनों पर कड़ी नजर रखी और मिशन की सफलता का पता लगाया।

इस परीक्षण का उद्देश्य तेजस पर विमान एवियोनिक्स, फायर कंट्रोल रडार, लांचरों और मिसाइल शस्त्र प्रणाली के साथ डर्बी मिसाइल प्रणाली के एकीकरण और उसके प्रदर्शन को आंकना था। इस परीक्षण को तेजस की फायरिंग क्षमता के बारे में बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। तेजस को पुराने मिग -21 की जगह लेने के लिए तैयार किया गया था लेकिन अब ये एक आधुनिक लड़ाकू विमान बन चुका है। तेजस का विकास लड़ाकू विमान बनाने की भारत की क्षमताओं को लेकर एक अहम कदम है। यह तेजस के लिए अंतिम ऑपरेशनल मंजूरी को हासिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो अब इस साल के अंत तक संभव मानी जा रही है। अगर यह हुआ तो अगले साल जून से ऑपरेशनल स्तर के विमान बन सकेंगे। तेजस वायुसेना में पुराने मिग 21 विमानों की जगह लेगा।

आपको बता दें कि तेजस का कुल वजन 6540 किलोग्राम है और पूरी तरह हथियारों से लैस होने पर यह करीब 10 हजार किलोग्राम वजनी हो जाता है। यह एक सीट और एक जेट इंजन वाला लड़ाकू विमान है जिसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा तैयार किया गया है। तेजस विमान 50 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ने की क्षमता रखता है। एक बार में यह 3000 किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है तेजस में हवा में ही ईंधन भरा जा सकता है। इस विमान के निचले हिस्से में एक साथ 9 तरह के हथियार लोड किए जा सकते हैं, जिनमें हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल, हवा से पानी में हमला करने वाली मिसाइल, हवा से धरती पर मार करने वाली मिसाइल, हवा से हवा में दूसरे लड़ाकू विमानों को मारने वाली लेजर गाइडेड मिसाइल, रॉकेट और बम शामिल हैं।

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