चिक्कमगलुरु में आखिरी नक्सली ने किया आत्मसमर्पण, राज्य हुआ नक्सल-मुक्त
कर्नाटक सरकार ने आधिकारिक रूप से राज्य को “नक्सल-मुक्त” घोषित कर दिया है। यह घोषणा तब हुई जब कोटेहोंडा रविंद्र, राज्य के अंतिम सक्रिय नक्सली, ने 1 फरवरी 2025 को चिक्कमगलुरु पुलिस अधीक्षक विक्रम अमाथे के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
कौन है कोटेहोंडा रविंद्र?
✔ उम्र: 44 वर्ष
✔ नक्सल गतिविधियों में संलिप्त: 18 साल
✔ प्रभाव क्षेत्र: कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु
✔ पंजीकृत केस: 27 मामले (13 सिर्फ चिक्कमगलुरु में)
✔ सरेंडर नीति के तहत लाभ: ₹7.5 लाख की सहायता राशि, स्किल ट्रेनिंग, ₹5,000 मासिक वजीफा
सरकार का रुख और नक्सल उन्मूलन योजना
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और गृह मंत्री डॉ. जी. परमेश्वर ने इस आत्मसमर्पण का स्वागत किया और इसे राज्य में शांति और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की जीत बताया। सरकार ने मार्च 2024 में नई नक्सल सरेंडर नीति लागू की थी, जिसके तहत बड़े नक्सलियों को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए विशेष पैकेज दिया जा रहा है।
क्या कहते हैं पुलिस अधिकारी?
चिक्कमगलुरु एसपी विक्रम अमाथे ने बताया,
“यह कर्नाटक पुलिस और प्रशासन के लिए ऐतिहासिक दिन है। अब कर्नाटक में कोई सक्रिय नक्सली नहीं बचा है।”
क्या कानून से बच पाएगा रविंद्र?
नहीं! आत्मसमर्पण के बावजूद रविंद्र के खिलाफ दर्ज 27 मामलों पर कानूनी कार्यवाही जारी रहेगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि न्याय प्रक्रिया बाधित नहीं होगी।
कर्नाटक में नक्सलवाद का अंत – एक ऐतिहासिक क्षण
कर्नाटक उन राज्यों में से एक था जहां नक्सली गतिविधियों का प्रभाव लंबे समय तक बना रहा। लेकिन सख्त सुरक्षा उपायों, सरकार की पुनर्वास नीति, और पुलिस के ठोस ऑपरेशन के चलते यह समस्या जड़ से खत्म हो गई।
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