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अभिव्यक्ति की आजादी मार्च में कन्हैया को नहीं मिला बोलने का मौका

दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में हुई हिंसाऔर एबीवीपी के खिलाफ शनिवार (4 मार्च) को प्रगतिशील छात्र एवं शिक्षक मंडी हाउस से मार्च करते हुए पार्लियामेंट स्ट्रीट पहुंचे. जहां यह मार्च आमजनसभा में बदल गया. जिसमें कई वक्ताओं ने अपनी बात को मुखरता के साथ रखा लेकिन वहीं मौजूद जेएनयूएसयू के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार को अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया. जबकि वह काफी देर तक इंतजार करते रहे.

सभा में बारी-बारी से तमाम वक्ताओं सहित कई छात्रों को बोलने का अवसर दिया गया. वहां मौजूद लोग बड़ी शालीनता के साथ सभी वक्ताओं की बात सुनते रहे लेकिन उस समय लोग निराश हो गए जब कन्हैया को बोलने का मौका न देकर सभा को समाप्त कर दिया. वहां मौजूद लोग इस बात का इंतजार कर रहे थे कि कन्हैया को भी सभा को संबोधित करने के लिए आमंत्रित किया जाएगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

वहां मौजूद लोगों ने आयोजकों पर कन्हैया के साथ पक्षपात करने का आरोप लगाया. उनका मानना था कि इस पूरी बहस की शुरुआत का हीरो कन्हैया है तो उसकी आवाज को क्यों दबाया गया. आखिर जो लोग अभिव्यक्ति की आजादी की बात कर रहे थे उन्होने ही पक्षपात करके कन्हैया के बोलने पर रोक लगा दी.

प्रदर्शनकारी छात्रों ने कहा कि सरकार पूछती है 20 साल की गुरमेहर के दिमाग में जहर किसने भरा, लेकिन उन्हें यह भी पता होना चाहिए कि जब भगत सिंह को फांसी लगी तो उनकी उम्र क्या थी. छात्रों ने कहा वह क्या पहनेंगे क्या बोलेंगे इसे सरकार नहीं तय कर सकती.

जंतर मंतर में छात्रों के प्रदर्शन को समर्थन देने के लिए राज्यसभा सासंद केसी त्यागी और सीताराम येचुरी भी पहुंचे. उन्होने इस दौरान रामजस विवाद को संसद में उठाने का भी आश्वासन दिया.

सीताराम येचुरी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, आपको यहां पढ़ाई और लड़ाई दोनों करना है. हम आपके साथ हैं. बीजेपी और एबीवीपी पर हमला करते हुए उन्होंने कहा, कौन राष्ट्रवादी है और कौन नहीं है, इसका निर्णय लेने वाले ये कौन होते हैं.

इस मौके पर जेएनयू के छात्र उमर खालिद ने कहा, यहां पर गुंडों को शह है यहां गुंडों का राज है. रोहित वेमुला को मार दिया जाए और नजीब को गायब कर दिया जाए तो अवॉर्ड मिलेंगे. आज छात्रों के बीच पहली बार प्रदर्शन के लिए पहुंचे उमर ने कहा, वे कहते हैं कि मेरे बोलने से छात्र भड़कते हैं. मैं कहता हूं कि आपको भड़कना भी चाहिए. असमानता के खिलाफ लड़ने वालों को बिल्कुल भड़कना चाहिए. अब गुलामी के दिन खत्म हो गए. पहले वे आते थे और हमें पीटकर चले जाते थे, पर अब ऐसा नहीं होगा.

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