भाजपा नेता और पांचवीं बार विधायक बने जयराम ठाकुर हिमाचल प्रदेश के 14वें मुख्यमंत्री होंगे। आज दोपहर शिमला में आयोजित नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक में ठाकुर को विधायक दल का नेता चुना गया। उन्हें एक भव्य समारोह में 27 दिसंबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है। जयराम के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह सहित कई अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हो सकते हैं ।

ठाकुर ने पूर्व मुख्‍यमंत्री शान्‍ता कुमार, प्रेम कुमार धूमल, केन्‍द्रीय पर्यवेक्षकों और पार्टी के वरिष्‍ठ नेताओं के साथ राजभवन जाकर राज्‍यपाल आचार्य देवव्रत को सरकार बनाने का दावा पेश करने वाला पत्र सौंपा। राज्‍यपाल ने जयराम ठाकुर को राज्‍य में सरकार बनाने का न्‍यौता दिया है।

इससे पहले पूर्व मुख्‍यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने जयराम ठाकुर का नाम मुख्‍यमंत्री पद के लिये प्रस्‍तावित किया। केन्‍द्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और वरिष्‍ठ सांसद शान्‍ता कुमार ने उनके नाम का समर्थन किया, बाद में केन्‍द्रीय पर्यवेक्षक और केन्‍द्रीय मंत्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर ने एक प्रेस वार्ता करके श्री जयराम ठाकुर का नाम मुख्‍यमंत्री के रूप में घोषित किया।

जयराम ठाकुर राज्य में राजनीतिक तौर पर महत्वूपर्ण मंडी क्षेत्र के पहले नेता हैं जो मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं । राज्य के अब तक के ज्यादातर मुख्यमंत्री शिमला, कांगड़ा और सिरमौर इलाके से होते थे ।

राजनीति में कदम रखने के समय से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में सक्रिय रहे जयराम हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल की हार के बाद राज्य के शीर्ष पद की रेस में आगे चल रहे थे । सुर्खियों से दूर रहने वाले जयराम मंडी के एक किसान परिवार से आते हैं । उन्होंने चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रैजुएशन की पढ़ाई की और यूनिवर्सिटी के दिनों में ही राजनीति में कदम रखने का फैसला किया ।

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जयराम ने 1993 का हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव भाजपा के टिकट पर लड़ा। 1993 के चुनाव में तो वह हार गए, लेकिन उसके बाद के सारे विधानसभा चुनाव उन्होंने जीते हैं । मृदुभाषी माने जाने वाले जयराम की ताकत यह है कि उन्हें एक ऐसे नेता के तौर पर देखा जा रहा है जिसने राज्य में पार्टी के अलग-अलग गुटों के बीच संतुलन स्थापित करने में सफलता पाई है ।

नए विधायकों के बीच आम सहमति नहीं बन पाने के कारण केंद्रीय पर्यवेक्षकों – सीतारमण और तोमर – को इस मुद्दे पर आलाकमान से दोबारा विचार-विमर्श करने के लिए शिमला से दिल्ली लौटना पड़ा। इससे पहले, केंद्रीय पर्यवेक्षकों का दो सदस्यीय दल राज्य में 21 और 22 दिसंबर को मौजूद था और उन्होंने राज्य भाजपा की कोर कमेटी के सदस्यों, सांसदों और कुछ विधायकों की राय ली थी।

ध्यान रहे धूमल कल तक दावेदारों की रेस में मजबूती से डटे थे, लेकिन बाद में उन्होंने अपने कदम पीछे खींच लिए । पार्टी विधायकों के एक धड़े ने पूर्व मुख्यमंत्री धूमल का समर्थन किया था ।

गौरतलब है कि भाजपा ने राज्य की 68 सीटों में से 44 सीटों पर जीत दर्ज कर कांग्रेस को साा से बेदखल किया है ।