स्मृति सुखद प्रहरों के लिए
अपने खंडहरों के लिए
यह जान लो, मैं विश्व की सम्पति चाहूँगा नहीं
वरदान मांगूंगा नहीं।
–शिवमंगलसिंह ‘सुमन’

आगे चार पंक्तियां:
कठिनतम समय में साथ रहा
इन सशक्त भावनाओं का
टूटा नहीं, बिखरा नहीं
पल-2, क्षण-2 संघर्षरत रहा, वरदान मांगा नहीं
वरदान मांगूंगा नहीं।
-लाल चन्द ढिस्सा

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