हिमाचल के कुल्लू मनाली में रविवार को व्यास नदी में भारी बारिश के कारण भयंकर बाढ़ जैसे हालात बन गए। बाढ़ का पानी कई राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी आ गया जिससे आने-जाने वाले पर्यटकों को भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। साल 1995 के बाद ऐसा मंजर पहली बार देखने को मिला है।
ऊंचाई वाले स्थानों पर हुआ हिमपात
कुल्लू जिले में दो दिन घनघोर वर्षा हुई है, जिससे व्यास नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया है तथा भयंकर बाढ़ के हालात बन गए हैं। जिले के कुछ क्षेत्रों में बाढ़ के पानी से काफी नुकसान हुआ है। बाशिंग और डोभी बिहाल इलाकों में बाढ़ का पानी और मलबा भर गया है। जिला प्रशासन ने कुल्लू के सभी सरकारी व निजी शिक्षण संस्थानों में 24 सितम्बर (सोमवार) को छुट्टी घोषित कर दी है। जिले में कई जगहों पर सड़कें धंस गईं हैं। पेड़ गिरे हैं। इस दौरान स्कूली बच्चों के साथ कोई घटना न हो, इसलिए प्रशासन ने स्कूल बंद रखने के आदेश दिए है। फिलहाल ये आदेश सोमवार के लिए हैं। कुल्लू के उपायुक्त यूनुस ने बताया कि जिले के सभी सरकारी व निजी स्कूलों, कालेजों और आईटीआई के विद्यार्थियों को एक दिन की छुट्टी रहेगी, जबकि सभी शिक्षक व गैर शिक्षक अधिकारी व कर्मचारी संस्थानों में उपस्थित रहेंगे।
राज्य की अधिकतर सड़कों पर आवाजाही बंद
भारी बारिश के कारण राज्य में हवाई व परिवहन व्यवस्था भी चरमरा गई है। व्यास में आया बाढ़ का पानी मंडी के डबोला में मनाली-चंडीगढ़ एनएच तक पहुंच गया है। भूस्खलन से एक नेशनल हाईवे सहित 126 सड़कों पर वाहनों की आवाजाही ठप पड़ गई है। शिमला जोन में सर्वाधिक 48 सड़कें भूस्खलन से अवरुद्ध हैं। इसके अलावा कांगड़ा जोन में 41, मंडी जोन में 36 सड़कें बंद हैं। मंडी-पठानकोट नेशनल हाईवे भी मलबा गिरने से बंद है। अप्पर शिमला की लाइफ-लाइन कही जाने वाली ठियोग-हाटकोटी सड़क भी बार-बार मलबा गिरने से अवरुद्ध हो रही है। इधर, रोहतांग में बर्फबारी के कारण मनाली-लेह सड़क भी बंद हो गई है। लोकनिर्माण विभाग के एसई अजय गर्ग ने बताया कि बंद सड़कों को खोलने के लिए 191 जेसीबी, 51 टिप्पर और 15 डोजर लगाए गए हैं।

