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गोरखपुर त्रासदी: मुख्यमंत्री का दोषियों को सजा का आश्वासन, मदद करने वाले डॉक्टर को हटाया

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि गोरखपुर के बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए राज्यी के मुख्य सचिव राजीव कुमार की अध्यक्षता में एक उच्चस्तिरीय समिति बनाई गई है।

योगी आदित्यनाथ ने आज अस्पताल में बच्चों के वार्ड का दौरा करने के बाद संवाददाता से बातचीत में कहा कि दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी किसी को बख्शा नहीं जायेगा। उन्होंने कहा कि चिकित्सा सुवि‍धाओं के अभाव में बच्चों की मौत होना बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

मुख्यमंत्री ने ट्वीट करके भी दोषियों को सजा देने की बात कही थी।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद वे चार बार अस्पताल का दौरा कर चुके हैं। वे इंसेफलाइटिस और इंसेफलाइटिस सिंड्रोम के लिए अस्पताल में दी जा रही चिकित्सा सुवि‍धाओं का जायजा लेने के लिए ही वहां गए थे।

योगी के साथ इस मौके पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और राज्य के शिक्षा चिकित्सा मंत्री आशुतोष टंडन भी मौजूद थे। नड्डा ने संवाददाताओं को बताया कि गोरखपुर में एक क्षेत्रीय मेडिकल रिसर्च सेंटर खोला जाएगा जिसके लिए केंद्र ने 85 करोड़ रूपये मंजूर किए हैं।

उन्होंने कहा कि बच्चों की मौत के कारणों का पता लगाने और चिकित्सा सुवि‍धाओं को बेहतर बनाने के लिए केंद्र की तीन डॉक्टरों की एक उच्चस्तरीय टीम गोरखपुर में मौजूद है।

नड्डा और योगी आदित्यानाथ अस्पताल में भर्ती बच्चों के परिजनों से भी मिले और उनसे बात की।

खबर आ रही है कि प्रदेश सरकार ने गोरखपुर के डॉ कफील अहमद को बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पीडियाट्रिक्‍स विभाग के नोडल अफसर पद से हटा दिया गया है। ये वही डॉक्टर हैं जिन्होंने अपनी जेब से पैसे खर्च करके कई बच्चों की जान बचाई थी। इन्होने अन्य डॉक्टरों की मदद लेते हुए वार्ड में ऑक्सीजन की कमी नहीं होने दी थी।

ज्ञात हो कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी के चलते 60 बच्चे अपनी जान गँवा चुके हैं। इसमें से बच्चे 30 तो एक ही रात में मौत के मुँह में समा गए हैं। इससे वहां की राज्य सरकार की देश भर से आलोचना होने लगी है। केंद्र सरकार के हर संभव सहायता के आश्वासन से भी लोगों में कोई संतुष्टि नज़र नहीं आ रही है।

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी इस मामले में देर से संज्ञान लेने पर उनकी आलोचना हो रही है।

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