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कोरोना प्रकोप : ठंडे क्षेत्रों के लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरुरत

Corona in Winters

आज, 22 नवंबर, 2020 को ‘सुप्रभात भारत’ क्रम में 243वीं कड़ी लिख चुका हूं। यानि लॉक डाउन (25.3.2020) से लेकर हर सुबह का पहला ट्वीट और एफ़बी पोस्ट। यद्यपि 22.3.2020 को कोरोना के विरुद्ध मैच (जनता कर्फ़्यू) शुरू हो चुका था।

उससे पहले 4 मार्च, 2020 को ‘कोरोना’ पर पहला ट्वीट और एफ़बी पोस्ट लिखी थी। 14.3.2020 को ‘स्पेनिश फ्लू’ (1918-20) पर एक लघु लेख। 18.3.2020 को लिखा था –‘कोरोना पर बिना शर्त सरकार का साथ, येस बैंक पर जांच की मांग और लोकतन्त्र पर चक्के (एनआरसी, एनपीआर, सीएए) का विरोध।’ 20.3.2020 को लिखा था- ‘संकल्प-संयम, जनता कर्फ़्यू, राष्ट्र रक्षक, थाली बजाओ जैसे शब्दजाल के बीच भी समस्त निर्देशों के पालन का वादा।’

इस स्तत निरन्तर क्रिया (सुप्रभात भारत) का उद्देश्य यह जानना है कि इस प्रकार के वायरल आक्रमण पर मौसम परिवर्तन का क्या कोई प्रभाव है ? क्योंकि मेरा मानना है कि इस तरह के वायरस तथा सांस संबन्धित बिमारियों पर मौसम का असर होता है। इस विषय पर मैंने 14.3.2020 के दिन, सौ साल पहले 1918-20 के विश्व महामारी ‘स्पेनिश फ्लू’ पर लिखा था कि तब के अनुभवजन्य साक्ष्य बताते हैं कि कम से कम हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पिती तथा कुल्लू में तो इस तरह का असर साफ दिखा था। जब यहां कि थोड़ी सी आबादी में भी सैंकड़ों लोग मरे थे।

अब भी ‘कोविद-19’ या ‘कोरोना’ का प्रकोप मौसम परिवर्तन यानि सर्दियों के आगमन (Corona in Winters ) के साथ बढ़ता हुआ लग रहा है। यद्यपि पहले विशेषज्ञों ने शंका व्यक्त की थी कि कोरोना पर मौसम का असर होगा। कुछ समय बाद इस से इंकार भी किया। लेकिन अब फिर कह रहे हैं सर्दियों (Corona in Winters ) में इसके बढ़ने की आशंका है। तथापि मैं आज भी अपनी मान्यता पर अडिग हूं, ठंडे मौसम में इसकी मर अधिक है। इस लिए विशेषकर ठंडे क्षेत्रों के लोगों से कहना चाहता हूं, उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

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