अमेरिका के बाद अब इज़राइल ने भी संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) से अपनी भागीदारी वापस ले ली है। इज़राइली सरकार ने इस फैसले को संगठन के “पक्षपाती रवैये” के खिलाफ उठाया गया कदम बताया है।
इज़राइली विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, “यूएनएचआरसी लंबे समय से इज़राइल के खिलाफ पूर्वाग्रह रखता है और हमारे हितों की निष्पक्ष समीक्षा करने में असफल रहा है।”
अमेरिका और इज़राइल का विरोध
इससे पहले, अमेरिका ने भी यूएनएचआरसी से अपनी सदस्यता वापस ले ली थी, यह आरोप लगाते हुए कि परिषद इज़राइल के खिलाफ “अत्यधिक आलोचनात्मक” है। अब इज़राइल के इस कदम को वाशिंगटन के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।
इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस निर्णय का समर्थन करते हुए कहा, “यूएनएचआरसी का ध्यान उन देशों पर होना चाहिए जो वास्तव में मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहे हैं, न कि इज़राइल पर, जो लोकतंत्र और स्वतंत्रता का पक्षधर है।”
फिलिस्तीन मुद्दे पर बढ़ता विवाद
यूएनएचआरसी ने हाल ही में गाजा में जारी संघर्ष और इज़राइल की सैन्य कार्रवाई को लेकर एक विशेष जांच शुरू की थी। इज़राइल ने इस जांच को “राजनीति से प्रेरित” करार दिया था और इसे अस्वीकार कर दिया था।
इज़राइली विदेश मंत्री ने कहा, “यह परिषद मानवाधिकारों की रक्षा के नाम पर एकतरफा एजेंडा चला रही है। हम अब इस पूर्वाग्रही मंच का हिस्सा नहीं बनेंगे।”
संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के कार्यालय ने इज़राइल के फैसले पर निराशा जताई और कहा कि “हर देश को मानवाधिकारों की सुरक्षा में योगदान देना चाहिए, और बातचीत के लिए दरवाजे खुले रखने चाहिए।”
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया
इज़राइल के इस कदम पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं मिली-जुली रही हैं। कुछ देशों ने इसे सही ठहराया, जबकि कई अन्य ने चिंता जताई कि यह वैश्विक मानवाधिकार संरचना को कमजोर कर सकता है।
इज़राइल द्वारा UNHRC से हटने का निर्णय वैश्विक राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, जो अंतरराष्ट्रीय संगठनों में पक्षपात और निष्पक्षता को लेकर बड़ी बहस को जन्म दे सकता है। अब यह देखना होगा कि इज़राइल और अमेरिका का यह रुख अन्य देशों को भी प्रभावित करता है या नहीं।
