भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का गुरुवार को दिल्ली में निधन हो गया। उन्होंने 93 साल की उम्र में आल इंडिया मेडिकल साइंस (एम्स) में शाम 5.05 मिनट पर अंतिम सांस ली। अटल का मुंबई से गहरा नाता रहा है। यहीं 29 दिसंबर, 2005 को उन्होंने ‘सत्ता की सक्रिय राजनीति’ से संन्यास लेने की घोषणा की थी। उस समय वे 81 साल के थे।
यह था अटल का अंतिम भाषण: मुंबई में बीजेपी की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने पर आयोजित रजत जयंती समारोह के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने राजनीतिक करियर से संन्यास लिया था। उस दौरान वाजपेयी ने अति संक्षिप्त भाषण में कहा था,”मैं परशुराम की तरह राज्याभिषेक के प्रसंग से अब अपने को अलग कर लेता हूं, अब मैं चुनाव नहीं लडूंगा। मैं काम करूंगा लेकिन सत्ता की राजनीति नहीं करूंगा।” वाजपेयी ने जब यह घोषणा की, उस वक्त कुछ क्षणों के लिए मंच और सभा में सन्नाटा-सा छा गया था। उनके भाषण से पहले भाजपा नेता प्रमोद महाजन ने कहा था कि अब पार्टी में दूसरी पीढ़ी के नेता तैयार हो चुके हैं।
हजारों लोगों के सामने की घोषणा: संन्यास की घोषणा के समय मुंबई के प्रसिद्ध शिवाजी मैदान पर भाजपा की एक आम सभा में हजारों लोग मौजूद थे। उस दिन से ठीक 25 साल पहले 29 दिसंबर 1980 को भारतीय जनता पार्टी की स्थापना की घोषणा हुई थी और वाजपेयी उस वक्त पार्टी के अध्यक्ष बने थे।
आरएसएस ने दी थी संन्यास की सलाह: अटल के संन्यास लेने से कुछ महीने पहले एक टेलीविजन चैनल को दिए गए साक्षात्कार में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के तत्कालीन प्रमुख के.सी सुदर्शन ने सलाह दी थी कि वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी दोनों की उम्र अधिक हो गई है और अब उन्हें सेवानिवृत हो जाना चाहिए। जिसके बाद अटल ने इस बयान का समर्थन करते हुए कहा था कि अधिक उम्र के नेताओं को सेवानिवृत्त हो जाना चाहिए।