‘द इंडियन एक्सप्रेस’ द्वारा कुछ दिन पहले ‘आईई-100’ 2018, ‘द लिस्ट ऑफ मोस्ट पावरफुल इंडियन्स’ का प्रकाशन किया गया। वैसे तो समाचार पत्र द्वारा यह लिस्ट हर साल प्रकाशित की जाती है, लेकिन मेरे रिकार्ड में सिर्फ 2014, 2016, 2017 व 2018 की सूचियां ही उपलब्ध थीं। इस लिए इन्हीं के आधार पर कुछ निष्कर्ष निकालने के प्रयास किए गए हैं और जिनको आप से सांझा कर रहा हूं।

सबसे पहले तो चार वर्षों की सूचियां :

क्षेत्र                           2014                     2016                   2017          2018
राजनेता                       43                       50                       56              54
कारपोरेट                      24                       18                       12             14
नौकरशाह + टेक्नोक्रेट     08                        09                      12              12
समाज कार्यकर्ता            02                        03                      03              02
विधिक क्षेत्र                  06                        03                      07              05
सिनेमा जगत               07                        06                      06              08
बैंकिंग                        03                        03                      03              03
खिलाड़ी                      03                        04                      01              02
कलाकार                     01                        00                      00              00
पत्रकार                       03                        04                      00              00
योग                         100                      100                    100            100

You May Also Like  यदि ‘मानव उत्पति’ का प्रश्न सिविल सेवा की परीक्षा में आया होता तो क्या होता मंत्री के आईपीएस का?

पुरुष                          87                        85                      90             89
महिला                       13                        15                      10             11

उपरोक्त रिपोर्ट के आधार पर निकाले गए कुछ निष्कर्ष :

1.      यद्यपि महिला सशक्तिकरण पर देश बहुत संजीदा है फिर भी महिलाएं शीर्ष की हिस्सेदारी में अभी बहुत पीछे हैं। 2014, 2016, 2017 तथा 2018 में महिलाओं का हिस्सा क्रमश: 13, 15%, 10% व 11% है।
2.      राजनेताओं का हिस्सा लगातार बढ़ता जा रहा था, जो 2014 में 43% था वह बढ़ कर 2017 में 56% हो गया लेकिन इस वर्ष घट कर 54 हो गया है।
3.      कारपोरेटर का हिस्सा 2014 में 24% था वह 2018 में भी 12% ही है, यद्यपि यह घट रहा है लेकिन मुकेश अंबानी जो 2014 की सूची में 16वें स्थान पर था वह 2017 में 7वें व 2018 में 10वें स्थान पर पहुंच गया। यानि महा कारपोरेटर की शुरुआत हो चुकी है।
4.      नौकरशाह और टेक्नोक्रेट्स का हिस्सा धीरे-2 बढ़ रहा है। 2014 में 8% से बढ़ कर 2018 में 12% हो गया।
5.      समाज कार्यकर्ताओं के हिस्से में 1% की गिरावट आई है, 2014 में 3% था 2018 में यह 2% रह गया है।
6.      विधिक क्षेत्र जिसमें न्यायधीश व प्रख्यात कानूनविध शामिल हैं 2014 जिनकी संख्या 6 थी, 2016 में घट कर 3 हो गयी लेकिन 2017 में वह 7 और 2018 में 5 हो गई है।
7.      सिनेमा जगत का हिस्सा 2014 के मुकाबले 2018 में 1% बढ़ा है।
8.      बैंकर्स के हिस्से में कोई फर्क नहीं पड़ा, वह 3% बना रहा।
9.      खिलाड़ियों का हिस्सा जो 2014 में 3% था वह घट कर 2018 में 2% रह गया।
10.     कलाकारों का हिस्सा 2014 में 1% था वह शून्य हो गया।
11.     पत्रकारों के मामले में 2014 में जो 3% था, बढ़ कर 2016 में 4% हुआ और 2017 से वह शून्य हो गया।

You May Also Like  इतिहास सुविधा और पसंद का नहीं होता

विशेष: 1.नरेन्द्र मोदी 2014 से 2017 तक लगातार पहले स्थान पर स्थिर हैं।
2. जबकि अमित शाह जो 2014 में 18वें स्थान पर थे 2017 में उछल कर 2सरे स्थान पर पहुंच गये और 2018 में भी 2सरे स्थान पर बने हुए हैं।
3. आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत जो 2016 में 2सरे स्थान पर थे 2017 से 3सरे स्थान पर हैं।
4. सोनिया गांधी और राहुल गांधी 2014 में क्रमश: 3सरे व 2सरे स्थान पर थे, 2017 में खिसक कर 9वें और 10वें स्थान पर पहुंच गए थे 2018 में 5वें और 11वें हैं।
5. 2014 में केजरीवाल 4थे स्थान पर थे लेकिन 2017 में 33वें पर और 2018 में धड़ाम से 73वें स्थान पर पहुंच गये हैं।
6. इसी तरह 2014 में क्षेत्रीय नेत्रियां जय ललिता, ममता बनर्जी व मायावती जो अपने दम पर क्रमश: 6टे, 7वें व 8वें स्थान पर विराजमान थीं। 2017 में उनमें जय ललिता तो रही नहीं, ममता 14वें तथा मायावती 50वें स्थान पर पहुंच गई थीं, 2018 में 6टे व 14वें स्थान पर हैं।