जिस राम मंदिर मुद्दे को केंद्र में भाजपा की सरकार आते ही बल मिला था उस मुद्दे को हाल के उत्तर प्रदेश चुनावों में पार्टी को मिली शानदार जीत ने और हवा दे दी है। अब इसी तर्ज पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साल 2016 की घोषणा पर अमल करते हुए अयोध्या में श्री राम के संग्रहालय के कार्य के शुरू होने की उम्मीद बढ़ गयी है ।

पिछले साल अक्तूबर में प्रधानमंत्री ने सबसे पहले राम संग्रहालय का निर्माण करने की इच्छा जाहिर की थी और इसके लिए उत्तरप्रदेश के अयोध्या में एक स्थान भी चिह्नित कर लिया गया था। लेकिन अखिलेश यादव की सरकार ने इस जमीन को आवंटित करने से मना कर दिया था। दरअसल यह संग्रहालय अखिलेश सरकार के अधीन नहीं आना था।

मार्च में जब राजनीतिक परिदृश्य बदला तो योगी आदित्यनाथ सरकार ने सरयू नदी के किनारे पर 25 एकड़ जमीन जारी की और अब केंद्र एवं उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से 225 करोड़ रूपए की लागत से संग्रहालय बनाया जाएगा। सूत्रों द्वारा हासिल किए गए परिकल्पना परिपत्र (कंसेप्ट नोट) के अनुसार, मुख्य ढांचा राम मंदिर के विवादित स्थान से लगभग छह किलोमीटर दूर होगी। यह एक भव्य मंदिर जैसा होगा और ‘राम दरबार’ में खुलेगा। इसमें वर्चुअल रिएलिटी और थ्री डी डिस्पले जैसी अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल होगा, जिन्हें प्राचीन परंपराओं का प्रदर्शन करने के लिए उपयोग किया जाएगा।
यह नोट कहता है कि संग्रहालय श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी है। यह भगवान राम की शिक्षाओं का प्रतीक होगा। इस नोट को राम अवतार ने तैयार किया, जो केंद्र द्वारा गठित रामायण सर्किट नेशनल कमेटी के अध्यक्ष हैं।

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अवतार ने संवाददाताओं से कहा कि उनकी शिक्षाएं सिर्फ हिंदुओं तक सीमित नहीं हैं। सभी धर्मों के लोगों के लिए भगवान राम का अपार महत्व है। संग्रहालय उनकी शिक्षाओं के ऐसे बहुत से पहलुओं को उजागर करेगा, जिन्हें विज्ञान समझ नहीं पाया है।
अवतार संग्रहालय के पीछे कोई राजनीतिक एजेंडा होने की बात से इनकार करते हैं। यह संग्रहालय 18 माह में पूरा होना है, जो कि वर्ष 2019 के आम चुनाव से ठीक पहले है। भारतीय जनता पार्टी राम मंदिर के मुद्दे को चुनाव प्रचार में उठा सकती है।