नई दिल्ली. अंतरर्राष्ट्रीय महिला दिवस के ठीक पहले महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों दिया बयान से विवादों में घिर गई. जिसमें उन्होने कहा कि, ‘जब आप 16-17 साल के होते है तो हार्मोन हो रहे बदलावों के चलते बहुत ही चुनौतीपूर्ण स्थिति में होते है. इन हार्मोन परिवर्तनों से आपकी सुरक्षा के लिए शायद एक लक्ष्मण रेखा जरूरी है.’

वहीं एक लड़की द्वारा पूछे गये सवाल क्या लड़कियों के हॉस्टल में भी लड़कों की तरह छूट नही होनी चाहिए? जवाब में मेनका ने कहा कि, ‘हार्मोन परिवर्तन लड़कों में भी होते है और उनके हॉस्टल से निकलने पर भी समय सीमा लागू होनी चाहिए.’

उन्होंने यह भी कहा कि, ‘लैंगिक संवेदीकरण में पुरुषों की भूमिका निर्णायक है क्योंकि सभी तरह की हिंसा पुरुषों की पैदा की हुई है.’ हमने स्कूलों में ‘जेंडर चैंपियन’ कार्यक्रम शुरू किया है. इसमें उन लड़कों को इनाम दिया जाएगा जो लड़कियों की मदद करेंगे और उनके प्रति सम्मान दिखाएंगे.

मेनका ने महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय की फेसबुक पर शुरू की गई पहल ‘100 वूमेन’ पर लोगों के सवालों के जवाब में यह बात कही. इसकी शुरुआत जुलाई में की थी. इसका मकसद देश की ऐसी 100 महिलाओं की तलाश है जिन्होंने अपने काम से अपने समुदायों में प्रभाव छोड़ा है, बदलाव की अलख जगाई है.

गुड़गांव में सऊदी अरब के राजनयिक द्वारा कथित रूप से दो नेपाली महिलाओं से दुष्कर्म के आरोप पर मेनका ने कहा कि, ‘यह आंख खोल देने वाली घटना है. केंद्र सरकार देखेगी कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या किया जा सकता है.’ इसके साथ ही कहा कि, मंत्रालय ने मुसीबत में फंसी महिलाओं की मदद के लिए ‘सखी’ नाम से केंद्रों की स्थापना की है.

You May Also Like  आज़ादी चुनने की; सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, कहा- समलैंगिकता अपराध नहीं

महिलाओं से जुड़े मामलों में भारतीय मीडिया अन्य देशों की तुलना में अधिक संवेदनशील है. पशु अधिकारों के लिए लड़ने वाली मेनका ने शिक्षा व्यवस्था के बारे में कहा, ‘मुझे लगता है कि शिक्षा को लैंगिक समानता पर और पशु अधिकारों पर अधिक संवेदनशील होना चाहिए.’ ‘100 वूमेन’ के तहत महिलाओं को मंत्रालय के फेसबुक पेज पर नामित किया जाएगा, जिसके बारे में सबसे अधिक संस्तुतियां होंगी उनके नाम निर्णायक मंडल के सामने रखे जाएंगे जो सौ महिलाओं का चयन करेगा.’