शनिवार को वामपंथी छात्र संगठनों ने दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में हुई हिंसा और एबीवीपी के खिलाफ मार्च निकाला. छात्रों का यह मार्च मंडी हाउस से जंतर मंतर तक निकला.

रामजस विवाद को लेकर लेफ्ट से जुड़े संगठनों ने शनिवार को मंडी हॉउस से जंतर मंतर तक मार्च किया. इसमें डीयू और जेएनयू से जुड़े छात्र छात्राएं शामिल हुए. मार्च में शामिल छात्रों सरकार के खिलाफ नारेबाजी की.

प्रदर्शनकारी छात्रों ने कहा कि सरकार पूछती है 20 साल की गुरमेहर के दिमाग में जहर किसने भरा, लेकिन उन्हें यह भी पता होना चाहिए कि जब भगत सिंह को फांसी लगी तो उनकी उम्र क्या थी. छात्रों ने कहा वह क्या पहनेंगे क्या बोलेंगे इसे सरकार नहीं तय कर सकती.

जंतर मंतर में छात्रों के प्रदर्शन को समर्थन देने के लिए राज्यसभा सासंद केसी त्यागी और सीताराम येचुरी भी पहुंचे. उन्होने इस दौरान रामजस विवाद को संसद में उठाने का भी आश्वासन दिया. सभा स्थल पर जेएनयू के पूर्व छात्रसंघ अध्‍यक्ष कन्हैया कुमार और योगेंद्र यादव भी मौजूद हैं.

सीताराम येचुरी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, आपको यहां पढ़ाई और लड़ाई दोनों करना है. हम आपके साथ हैं. बीजेपी और एबीवीपी पर हमला करते हुए उन्होंने कहा, कौन राष्ट्रवादी है और कौन नहीं है, इसका निर्णय लेने वाले ये कौन होते हैं.

इस मौके पर जेएनयू के छात्र उमर खालिद ने कहा, यहां पर गुंडों को शह है यहां गुंडों का राज है.  रोहित वेमुला को मार दिया जाए और  नजीब को गायब कर दिया जाए तो अवॉर्ड मिलेंगे. आज छात्रों के बीच पहली बार प्रदर्शन के लिए पहुंचे उमर ने कहा, वे कहते हैं कि मेरे बोलने से छात्र भड़कते हैं. मैं कहता हूं कि आपको भड़कना भी चाहिए. असमानता के खिलाफ लड़ने वालों को बिल्कुल भड़कना चाहिए. अब गुलामी के दिन खत्म हो गए. पहले वे आते थे और हमें पीटकर चले जाते थे, पर अब ऐसा नहीं होगा.

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