वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) के ज़ीका वायरस पर ग्लोबल अलर्ट के बाद भारतीय अधिकारियों ने गर्भवती महिलाओं को सलाह दी है कि वे वायरस से प्रभावित देशों की यात्रा पर न जाएं।
वहीं, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सोमवार को एक हाईलेवल मीटिंग की। उन्होंने बताया कि जीका वायरस को लेकर प्रस्तावित विस्तृत गाइडलाइंस और डब्ल्यूएचओ की ओर से बुलाई गई इमरजेंसी मीटिंग के निष्कर्षों को लेकर चर्चा हुई। नड्डा ने कहा कि भारत जल्द ही गाइडलाइंस जारी करेगा।
ये बीमारी भारत के लिए ज्यादा चिंता का विषय है क्यूंकि 50 के दशक में यह बीमारी यहाँ फैल चुकी है। बीबीसी की रिपोर्ट में पुणे की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) की स्टडी का हवाला देते हुए यह बताया गया है।
एनआईवी की एक टीम ने 1953 में एक रिसर्च पेपर पब्लिश किया था। उन्होंने कीटों से होने वाली बीमारियों को लेकर किए गए प्रयोग के आधार पर यह पेपर जारी किया था। इन बीमारियों में से एक जीका वायरस भी था। यह पाया गया कि 50 के दशक में ‘ठीक-ठाक’ संख्या में लोग इस बीमारी से पीडि़त हुए। 1954 में नाइजीरिया में मानव में पहली बार इस बीमारी के पाए जाने से काफी पहले। भारतीय वैज्ञानिकों ने उस वक्त इस बीमारी को ज्यादा तवज्जो इसलिए नहीं दी क्योंकि इसके पीडि़त लोगों को हल्का बुखार होता था और शरीर पर हल्के चकत्ते पड़ते थे।