उच्चतम न्यायालय में आज तीन तलाक मुद्दे पर सुनवाई जारी रही। अदालत ने मुस्लिम संगठनों से पूछा कि ये प्रथा आस्था का विषय कैसे हो सकती है, जबकि धर्मशास्त्र के मुताबिक वे इसे पितृ सत्तात्मक, धर्म विज्ञान के अनुसार गलत और पापपूर्ण बता रहे हैं।
प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे एस खेहर की अध्यक्षता में पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने मुस्लिम समुदाय में तीन तलाक की संविधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर संबंधित पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। ग्रीष्म अवकाश में छह दिन चली सुनवाई के दौरान केन्द्र सरकार, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और कई अन्य ने अपना पक्ष रखा।

तीन तलाक की पीडि़ता सायरा बानो का पक्ष अदालत में रखते हुए वरिष्ठ वकील अमित सिंह चढ्ढा ने कहा कि न्यायपालिका ही लोगों की एकमात्र उम्मीद है।

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