पाना और खोना
सिक्के के दो पहलू हैं
दो सिक्के नहीं।
पाने के लिए
कुछ खोते हैं
खोने के लिए
कुछ पाते हैं।

कुछ पाते-पाते
खो जाता है
कुछ खोते–खोते
मिल जाता है।

कुछ पाने के लिए
सब खो देते हैं
कुछ खोकर
सब पा लेते हैं।

सब कुछ खोकर
कुछ पाने पर खुश रहते हैं
कुछ खोकर
सब पाने पर भी दुखी होते हैं।

कुछ सिर्फ पाते ही हैं
खोते नहीं
कुछ खोते ही हैं
पाते कुछ नहीं।

कुछ सब खोकर भी पाते हैं
खोते नहीं
कुछ सब पाकर भी खोते हैं
पाते नहीं।

कुछ इतना पाते हैं
जो सम्भाल नहीं पाते
कुछ इतना खोते हैं
कि सम्भल नहीं पाते।

कुछ पाने के नशे में
मदहोश रहते हैं
कुछ खोने के गम में
चित पड़े रहते हैं।
— ल॰च॰ढिस्सा (ज़िया, कुल्लू—1.12.1991)

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