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बॉलीवुड के बड़े एक्टरों में शुमार सुशांत सिंह राजपूत, क्रिटिकली एक्लेम्ड एक्टर आसिफ बसरा, सात बात से दादर और नागर से मेंबर ऑफ़ पार्लियामेंट मोहन देलकर, देश के सबसे बड़ी Parliamentary constituency (Mandi) से दो बार के MP राम स्वरुप शर्मा और दंगल फिल्म से फेमस और रेसलिंग की दुनिया में सक्सेसफुल परिवार से रितिका फोगट इन सब का अचानक सुसाइड (Suicide) करना एक सवाल पैदा कर देता है कि क्या नाम, पैसा और ओहदा भी इंसान को सुखी जीवन नहीं दे सकते है

अगर दुनिया में सबसे पावरफुल चीज की बात करें तो क्या जवाब हो  सकता है पैसा, नाम या फिर ओहदा  … कुछ ऐसे लोग होते हैं जिनके पास ये तीनो चीजें होती है और लगभग तमाम लोग हैं दुनिया में जो इनकी चाहत में ज़िन्दगी गुजार देते हैं .. बहुत कम ऐसे होते हैं जो इनको ज़िन्दगी में जरूरी नहीं मानते.. वो लोग दूसरी मिटटी के बने होते हैं

सवाल ये उठता है की अगर पैसा, नाम और ओहदा में से कोई एक चीज भी इंसान के पास हो तो क्या उसे हम कामयाब कह सकते हैं .. अगर हाँ तो फिर क्या वो चीज है जो इन लोगों को अपनी जान खुद से ही ले लेने को मजबूर करती है… एक आम इंसान की ज़िन्दगी में शायद सबसे बड़ी जरुरत पैसा और नाम की होती है, जिसके न मिलने पर शायद वो डिप्रेस हो जाता हो और ज़िन्दगी से हार मान लेने की भी सोचता हो … लेकिन क्या ऐसा हो सकता है की जितना ज्यादा पैसा, नाम और ओहदा हो उस चीज को मेन्टेन रखना उतना ही मुश्किल हो जाता है.. क्या हम ये कह सकते हैं की जितनी बड़ी आत्महत्या उसके पीछे उतनी बड़ी साजिश होती है

सुशांत सिंह राजपूत बॉलीवुड के बड़े कमर्शियल सिनेमा के एक्टरों में शुमार थे लेकिन अचानक उनकी मौत की खबर (Suicide) चौंकाने वाली थी … ऐसा नहीं है की बॉलीवुड के लोगों ने इससे पहले कभी आत्महत्या नहीं की हो बहुत बड़े-बड़े नाम हैं जो इस दुनिया को खुद से छोड़कर चले गए … बहुत लोगों की मौत अब भी रहस्य ही है .. लेकिन अपनी साइड की स्टोरी सुनाने के लिए वो लोग अब दुनिया में नहीं है .. आसिफ बसरा दूसरे ऐसे एक्टर जो फिल्मों में बहुत अच्छा काम करके नाम बना रहे थे.. उन्होंने अचानक मौत को गले लगा लिया (Suicide) अब इतना बड़ा कदम लेने की लिए मजबूर होने वाली वजह तो बिलकुल भी मामूली नहीं हो सकती… इनके अलावा पिछले एक साल के अंदर ही बहुत से इंडस्ट्री के लोगों ने अपनी जान दे दी .. क्या इन लोगों को शोहरत और पैसे की कमी थी, नहीं थी… जितना इनके पास होता है उसका कुछ परसेंट भी आम इंसान के पास हो तो शायद वो खुद को खुशनसीब समझे

अब अगर ओहदे और पावर की बात करें तो इस देश के लोकतंत्र के मंदिर पार्लियामेंट में चुने हुए नेता से ज्यादा पावर आप किसके पास मान सकते हैं..  मेंबर ऑफ़ पार्लियामेंट अगर खुद ही अपनी जान ले लें (Suicide) तो इस देश के आम आदमी के ज़िन्दगी की परेशानियों का अंदाज़ा आप लगा सकते हैं.. जिसके पास तो पावर और ओहदा भी नहीं है .. ये सांसद भी कोई नया-नया सांसद नहीं, सात बात दादरा और नागर से मेंबर ऑफ़ पार्लियामेंट चुन कर आये हुए मोहन देलकर ने मुंबई में एक होटल में आत्महत्या कर ली … इलज़ाम लगे दादरा और नागर के एडमिनिस्ट्रेशन पर की उन्हें शर्मिंदा किया जाता था और सताया जाता था … इतना बड़ा इंसान क्या सिस्टम के आगे इतना कमजोर हो सकता है समझ नहीं आता

देश की सबसे बड़ी Constituency हिमाचल प्रदेश की मंडी से चुन कर आये संसद राम स्वरुप शर्मा का अचानक आत्महत्या (Suicide) कर लेना बहुत बड़ा सवाल है की क्या इतने बड़े इलाके का रिप्रेजेन्टेटिव कमज़ोर था या उनके ऊपर पड़ने वाला प्रेशर ही इतना बड़ा था… की जिसके सामने ये सांसद की कुर्सी और उसकी ताकत की कोई हैसियत नहीं … इन्वेस्टीगेशन होगी तो कुछ चीजें खुल कर सामने आ जाये और शायद बहुत सी चीजें दब भी जाए … लेकिन बॉलीवुड इंडस्ट्री के रहस्यमयी दुनिया से हटकर राजनीती तो एक सफेदपोश लोगों का पेशा है बेशक दिखने के लिए ही हो … लेकिन यहाँ पर भी ऐसी कौन सी साजिश चल रही है जिसमे से छुटकारा पाने का तरीका सिर्फ आत्महत्या है

बात कर लें अगर ताज़ा-ताज़ा आत्महत्या (Suicide) के बड़े मामले की वो है फोगट परिवार की एक होनहार बेटी रितिका फोगट की… महज़ 17 साल की उम्र में एक गेम में मिली हार इतना क्या झकजोर देती है की ये प्रतिभावान लड़की आत्महत्या जैसा बड़ा कदम उठा लेती है … इस खबर ने सबको झकजोर कर रख दिया की एक मजबूत शरीर वाली लड़की एक कमजोर दिमाग से हार गयी… शायद परिवार की बुलंदियों और अचीवमेंट्स का प्रेशर ही इतना रहा होगा की रितिका ने इतना बड़ा फैसला लिया .. लेकिन बात जो भी हो आत्महत्या कोई सोलुशन तो नहीं है … आपकी साइड ऑफ़ स्टोरी दुनिया से कौन कहेगा ?

अब अगर सुसाइड से रिलेटेड डाटा की बात करें तो दुनिया में हर साल लगभग आठ लाख लोग सुसाइड करते हैं .. जिसमे से 17% तो अकेले भारत में आत्महत्याएं होती हैं.. साल 2017 में एक लाख उनतीस हजार से ज्यादा लोगों ने सुसाइड किया, 2018 में एक लाख चौंतीस हजार से ज्यादा लोग और 2019 में एक लाख उन्तालीस हजार से ज्यादा लोग खुदखुशी कर गए … ये आंकड़े बताते हैं की हर साल एक लाख से ज्यादा लोग आत्महत्याएं कर रहे हैं और ये नंबर लगातार बढ़ रहा है… इसी तरह 2020 जिसे कोरोना साल कह सकते हैं में कितनी ज्यादा आत्महत्याएं हुई होंगी … जहाँ पूरी दुनिया के साथ-साथ हमारे देश में भी लोग, बेरोज़गार, भूखे और हेल्पलेस थे ऐसे माहौल में हुई मौतों का अंदाज़ा आसानी से लगाया जा सकता है .. देश में होने वाली ज्यादातर आत्महत्याएं भी या तो कर्जा न चूका पाने और फसल बर्बाद हुए किसानो की, या Exams में फ़ैल हुए स्टूडेंट्स या फिर शहरों की चकाचौंध की दौड़ में पिछड़ गए किसी इंसान की ही होती हैं

इसलिए साधन संपन्न इंसान जब आत्महत्याएं करता हैं तो सवाल मन में वाजिब उठता है की हर सुख-सुविधा खरीदने के लायक होने के वाबजूद ऐसी कौन सी परेशानी होती है जिससे कोई भी इंसान जीत नहीं पाता

जिस तरह सुशांत सिंह राजपूत मामले में एक तरीके से एक्टर के इस कदम का जिस तरह से ग्लोरिफिकेशन हुआ है और जिस तरह आये दिन Twitter पर एक्टर की मौत के लिए ट्रेंड बनते हैं ये चीजें लोगो को मोटीवेट कर रही है ज़िन्दगी से हार मान कर मौत को गले लगा लेने के ऑप्शन को चुनने की.. ख़ुदकुशी करना और इसकी कोशिश करना कानूनी अपराध है … जिसे जायज कतई नहीं ठराया जा सकता है … लेकिन एक बात तो ये भी है की सुशांत सिंह जैसी ख़ुदकुशी के बाद इन्वेस्टीगेशन और लाइमलाइट हर किसी को नहीं मिलती .. बेशक वो सात बार का MP या फिर सबसे बड़ी Constituency का रिप्रेजेन्टेटिव ही क्यों न हो … जब इन लोगों की मौतों पर कोई बड़ी प्रतिक्रिया नहीं है तो फिर एक आम किसान और गरीब या पिछड़े छात्र की मौत इस सिस्टम के लिए कितनी यूजलेस होगी समझा जा सकता है .. आत्महत्याओं को condemn किया जाना चाहिए… Glorify नहीं वर्ना इस देश में हर दिन कोई सुशांत सिंह अपनी जान मुक्ति और प्रसिद्धि की उम्मीद में ले लेगा.

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